गुरु महिमा के भजनों से गूंजा विधाणी आश्रम, 12 अक्टूबर को होगी परिक्रमा

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

मिथिला बिहारी महाराज ने दिया गुरु महिमा का संदेश, लोक कलाकारों की भजन प्रस्तुतियों पर झूमे श्रद्धालु

जयपुर। गोनेर रोड स्थित विधाणी के श्रीगोपाल सागर आश्रम में श्रीविधाणी परिक्रमा महोत्सव के तहत गुरुवार शाम भजन संध्या का आयोजन हुआ। रामधुन और गुरु महिमा के भजनों से आश्रम परिसर भक्तिमय हो उठा। स्थानीय और बाहर से आए लोक कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भावपूर्ण भजनों पर श्रद्धालु देर तक नृत्य करते रहे और भक्ति में लीन नजर आए।

लोक कलाकार महेश शर्मा ने ‘गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना’ और ‘भज ले रे बाबा भजनानंद को भज ले’ जैसे भजन प्रस्तुत किए। वहीं, जगदीश छीपा ने ‘गुरु मेरी पूजा गुरु भगवंता’, रमेश छीपा ने ‘विधाणी का महाराज राखो म्हारी लाज’ और कन्हैया लाल ने ‘मैं तो पीऊं गुरु नाम का प्याला’ सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

आश्रम के लक्ष्मी निधि सरजू बिहारी ने बताया कि मिथिला बिहारी महाराज के नेतृत्व में 7 से 12 अक्टूबर तक श्रीविधाणी परिक्रमा महोत्सव मनाया जा रहा है। महोत्सव के दौरान आश्रम में अखंड रामधुन जारी है। प्रतिदिन शाम को आयोजित भजन संध्या में आकाशवाणी, दूरदर्शन से जुड़े कलाकारों सहित लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं। विभिन्न मठों, मंदिरों और धामों से आए संत-महात्माओं ने भी प्रवचन देकर श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिए।

कार्यक्रम में जयपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान सैकड़ों भक्तों ने पंगत प्रसादी ग्रहण की। महोत्सव के तहत 12 अक्टूबर को श्रीविधाणी परिक्रमा आयोजित होगी।

तीर्थ यात्रा से पहले गुरु की आज्ञा जरूरी: मिथिला बिहारी महाराज

महोत्सव में प्रवचन देते हुए मिथिला बिहारी महाराज ने कहा कि देवी-देवताओं की आराधना में गुरु का विशेष स्थान है। गुरु ही व्यक्ति को ज्ञान और सही मार्ग का बोध कराते हैं। वेदों, ग्रंथों और शास्त्रों में भी गुरु की महिमा का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि तीर्थ और धाम की यात्रा पर जाने से पहले गुरु से आज्ञा लेना अनिवार्य है।

अयोध्या से आए संत लक्ष्मण जिलाधीश ने कहा कि जीवन के अच्छे-बुरे और उतार-चढ़ाव भरे दौर में गुरु मार्गदर्शन करते हैं। बीमारी, परेशानी और आर्थिक संकट जैसी कठिन परिस्थितियों में भी गुरु व्यक्ति को संबल देते हुए आगे बढ़ने की राह दिखाते हैं।

 

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