देवास परियोजना के तृतीय-चतुर्थ चरण के काम में तेजी

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

  उदयपुर को मिलेगा 1000 एमसीएफटी अतिरिक्त पानी

बांध और टनल का निर्माण प्रगतिरत, पिछोला-फतहसागर में जलस्तर बनाए रखने में मिलेगी मदद

जयपुर, 8 अक्टूबर 2026। उदयपुर की दीर्घकालीन जल सुरक्षा को मजबूत करने वाली देवास परियोजना के तृतीय और चतुर्थ चरण के निर्माण कार्यों में तेजी आई है। परियोजना के तहत बांधों और टनल का निर्माण प्रगतिरत है। राज्य सरकार के अनुसार इन दोनों चरणों के पूरा होने पर उदयपुर शहर को प्रतिवर्ष करीब 1000 एमसीएफटी अतिरिक्त जल उपलब्ध हो सकेगा।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में आगे बढ़ रही इस अंतर-बेसिन जल हस्तांतरण परियोजना का उद्देश्य साबरमती बेसिन के उस पानी को उदयपुर की जल व्यवस्था से जोड़ना है, जो वर्तमान में बहकर अरब सागर की ओर चला जाता है। परियोजना के तहत इस जल को बनास बेसिन की दिशा में अपवर्तित किया जाएगा।

अंबावा में 390 एमसीएफटी क्षमता का बांध

देवास-चतुर्थ परियोजना के तहत उदयपुर जिले की गोगुंदा तहसील के अंबावा गांव के पास 390 एमसीएफटी क्षमता के बांध का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ 4.15 किलोमीटर लंबी टनल भी बनाई जा रही है। इस व्यवस्था के जरिए जल को देवास-तृतीय परियोजना की ओर अपवर्तित किया जाएगा।

इसी तरह नाथियाथल गांव के पास 703 एमसीएफटी क्षमता के देवास-तृतीय बांध का निर्माण जारी है। यहां से पानी को 10.50 किलोमीटर लंबी टनल के माध्यम से मौजूदा देवास-द्वितीय यानी आकोदड़ा बांध तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। आवश्यकता के अनुसार इस जल को आगे पिछोला झील में अपवर्तित किया जाएगा।

पिछोला और फतहसागर का जलस्तर रहेगा बेहतर

परियोजना के तृतीय और चतुर्थ चरण पूरे होने के बाद उदयपुर को हर साल करीब 1000 एमसीएफटी अतिरिक्त पानी मिलने का दावा किया गया है। इससे शहर की बढ़ती पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही उदयपुर की पहचान मानी जाने वाली पिछोला और फतहसागर झीलों में जलस्तर बनाए रखने में भी परियोजना की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। झीलों में पर्याप्त पानी रहने से पर्यटन और ईको-टूरिज्म से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर भी जोर

परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर भी राज्य सरकार ने आवश्यक कदम उठाने की बात कही है। प्रभावित परिवारों को परियोजना क्षेत्र के आसपास ही पुनर्वासित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए आवासीय भूखंड के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि प्रभावित परिवारों का सुरक्षित और व्यवस्थित पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

1974 में शुरू हुआ था देवास परियोजना का पहला चरण

उदयपुर की जल सुरक्षा के लिए देवास परियोजना का पहला चरण वर्ष 1974 में शुरू हुआ था। इसके बाद देवास-द्वितीय परियोजना वर्ष 2015 में पूरी हुई। इसके तहत आकोदड़ा बांध और सुरंग प्रणाली के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण आधारित व्यवस्था से पानी को उदयपुर की पिछोला झील तक पहुंचाने का प्रबंध विकसित किया गया।

अब देवास-तृतीय और देवास-चतुर्थ चरण को उदयपुर की दीर्घकालीन जल सुरक्षा की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इन चरणों के पूरा होने से शहर की पेयजल व्यवस्था के साथ झीलों के जलस्तर को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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