कांग्रेस में एकता सिर्फ फोटो फ्रेम तक, मन में भरे हैं मतभेद: मदन राठौड़

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कांग्रेस पर हमला—कहा, एकजुटता का स्वांग कर रही पार्टी, गहलोत आज भी खुद को ‘मठाधीश’ मानते हैं; पंचायत चुनाव में निकाय से भी बड़ी हार का दावा

जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस की एकजुटता के दावों पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेता भले ही मंच और तस्वीरों में एक साथ नजर आ रहे हों, लेकिन पार्टी के भीतर मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस की एकता “फोटो फ्रेम के लिए ही है, मन में तो भरपूर मतभेद भरा हुआ है।”

राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस में नेताओं के बीच एक-दूसरे से आगे निकलने और अपनी राजनीतिक हैसियत साबित करने की होड़ बनी हुई है। उनके मुताबिक, मंच पर नेताओं का साथ बैठना अलग बात है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके समर्थकों और संगठन के बीच तालमेल कितना है, यह चुनाव में सामने आएगा।

बार-बार एकता बताने की जरूरत क्यों पड़ रही?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस वास्तव में पूरी तरह एकजुट है तो उसे बार-बार एकता का संदेश देने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर आपसी खींचतान और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई अभी भी कायम है, जिसका असर आगामी पंचायत चुनाव में दिखाई दे सकता है।

राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस केवल एकजुटता का स्वांग रच रही है। उनके अनुसार, चुनावी मैदान में कांग्रेस नेताओं और उनके समर्थकों के बीच वास्तविक समन्वय की तस्वीर साफ हो जाएगी।

‘गहलोत आज भी खुद को मठाधीश मानते हैं’

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए राठौड़ ने कहा कि गहलोत आज भी खुद को कांग्रेस का स्थायी प्रभारी या ‘मठाधीश’ मानकर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी वरिष्ठ नेता को अपनी भूमिका को संगठन में सबसे ऊपर रखने के बजाय दूसरे नेताओं को भी राजनीतिक और संगठनात्मक स्थान देना चाहिए।

राठौड़ का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस के भीतर एकजुटता दिखाने की कोशिशों के बीच पुराने नेतृत्व और नई पीढ़ी के नेताओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।

पायलट को लेकर गहलोत के बयान पर भी पलटवार

मदन राठौड़ ने अशोक गहलोत के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि सचिन पायलट इस बार पहले जैसी गलती नहीं करेंगे। राठौड़ ने कहा कि एक तरफ कांग्रेस नेता एकजुटता की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके बयानों में पुराने राजनीतिक मतभेदों की झलक दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस में नेतृत्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर खींचतान लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। ऐसे में पंचायत चुनाव कांग्रेस की आंतरिक स्थिति की भी परीक्षा होंगे।

पंचायत चुनाव में निकाय से भी बड़ी हार का दावा

राठौड़ ने आगामी पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस पर बड़ा राजनीतिक हमला करते हुए दावा किया कि कांग्रेस को पंचायत चुनाव में निकाय चुनाव से भी बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह नगरीय निकाय चुनाव में जनता ने कांग्रेस को नकारा, उसी तरह पंचायत चुनाव में भी मतदाता कांग्रेस को जवाब देंगे।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पिछले ढाई साल में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने जनता के लिए कई काम किए हैं। उनका दावा है कि इन कार्यों के आधार पर जनता भाजपा पर भरोसा जताएगी और पंचायत चुनाव में भी पार्टी को इसका लाभ मिलेगा।

राठौड़ का सीधा संदेश: कांग्रेस की एकजुटता का असली इम्तिहान मंच पर नहीं, बल्कि पंचायत चुनाव के मैदान में होगा। परिणाम बताएंगे कि नेताओं की तस्वीर में दिख रही एकता जमीन पर कितनी मजबूत है।

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