भरोसीलाल जाटव ने कैसे जीता जनता का भरोसा, 5 बार रहे विधायक

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

भरोसीलाल जाटव, पांच बार विधायक और मंत्री कैसे बने?

नीरज मेहरा वरिष्ठ संवाददाता

राजस्थान की राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे रहे हैं, जिन्होंने लगातार जीत की बजाय हार के बाद वापसी से अपनी पहचान बनाई। हिण्डौन के भरोसीलाल जाटव इसी राजनीतिक सफर का एक प्रमुख नाम हैं। किसान परिवार से निकले जाटव ने अलग-अलग दौर में अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर चुनाव लड़ा, हार का सामना किया और फिर वापसी की। पांच बार हिण्डौन से विधायक बने और अशोक गहलोत सरकार में मंत्री भी रहे।

किसान परिवार से राजनीति तक

भरोसीलाल जाटव का जन्म 2 अगस्त 1948 को करौली जिले के झिरना गांव में हुआ। उनके पिता टेक राम जाटव किसान थे। उपलब्ध जीवनी विवरणों में जाटव का प्राथमिक व्यवसाय कृषि दर्ज है। यही ग्रामीण पृष्ठभूमि आगे चलकर उनकी राजनीति की बुनियाद बनी।

1980 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। जनता पार्टी (सेक्युलर) के टिकट पर मैदान में उतरे और कांग्रेस के पारसराम को 1,106 वोटों से हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। यह उनकी चुनावी राजनीति की शुरुआत थी।

जीत के बाद हार, फिर वापसी

1985 में जाटव लोकदल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन कांग्रेस के उम्मेदी लाल से 8,756 वोटों से हार गए। पांच साल बाद 1990 में जनता दल के टिकट पर उन्होंने फिर वापसी की और कांग्रेस के कालूराम को 4,710 वोटों से हराया।

1993 में भाजपा के कमल राम कोली से हार के बाद 1998 में कांग्रेस के टिकट पर फिर चुनाव जीता। इस बार उन्होंने निर्दलीय कालूराम को 6,809 वोटों से पराजित किया। इसके बाद 2003 में उन्हें एक और झटका लगा और INLD के कालूराम ने उन्हें 4,634 वोटों से हराया।

चुनावी रिकॉर्ड एक नजर में

वर्ष जाटव की स्थिति पार्टी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी परिणाम/अंतर
1980 विजेता जनता पार्टी (सेक्युलर) पारसराम, कांग्रेस 1,106 वोट से जीत
1985 पराजित लोकदल उम्मेदी लाल, कांग्रेस 8,756 वोट से हार
1990 विजेता जनता दल कालूराम, कांग्रेस 4,710 वोट से जीत
1993 पराजित — कमल राम कोली, भाजपा हार
1998 विजेता कांग्रेस कालूराम, निर्दलीय 6,809 वोट से जीत
2003 पराजित कांग्रेस कालूराम, INLD 4,634 वोट से हार
2008 विजेता कांग्रेस राजकुमारी, भाजपा 1,855 वोट से जीत
2013 पराजित कांग्रेस राजकुमारी, भाजपा 8,111 वोट से हार
2018 विजेता कांग्रेस मंजू खैरवाल, भाजपा 26,780 वोट से जीत
2023 चुनाव नहीं लड़ा — — कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया

स्रोत: चुनाव आयोग आधारित चुनाव परिणाम संकलन।

जिला प्रमुख से मंत्री तक

2005 में भरोसीलाल जाटव करौली के जिला प्रमुख बने। इसके बाद 2008 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर हिण्डौन से वापसी की। भाजपा की राजकुमारी को 1,855 वोटों से हराकर चौथी बार विधानसभा पहुंचे।

2 मार्च 2009 को उन्हें अशोक गहलोत सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया। उनके पास एस्टेट विभाग का स्वतंत्र प्रभार रहा, जबकि कृषि, पशुपालन, मत्स्य और राजस्थान राज्य मोटर गैराज जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी रही। वे 16 नवंबर 2011 तक सरकार में रहे।

मंत्री रहते विवाद भी जुड़ा

मंत्री पद पर रहते हुए जाटव और उनके बेटों से जुड़े कथित अवैध खनन के मामलों ने राजनीतिक विवाद खड़ा किया। 2011 में अदालत के निर्देश पर उनके और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई तथा बाद में राजस्थान हाईकोर्ट में मामले की जांच को लेकर कार्यवाही हुई। उपलब्ध रिपोर्टों में इस प्रकरण को लेकर आरोप और जांच का उल्लेख है; इसलिए इसे किसी अंतिम दोषसिद्धि के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

इसी राजनीतिक विवाद के बीच नवंबर 2011 के मंत्रिमंडल फेरबदल में जाटव को मंत्री पद से हटा दिया गया।

2013 की हार के बाद सबसे बड़ी वापसी

2013 में भाजपा की राजकुमारी जाटव ने उन्हें 8,111 वोटों से हराया। इसके बाद 2018 में जाटव ने अपने राजनीतिक सफर की सबसे बड़ी वापसी दर्ज की।

कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर उन्हें 1,04,694 वोट मिले, जबकि भाजपा की मंजू खैरवाल को 77,914 वोट मिले। जीत का अंतर 26,780 वोट रहा। यह उनका पांचवां विधानसभा चुनाव था जिसमें वे विजयी हुए।

2023 में टिकट कटा, विधानसभा सफर थमा

2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पांच बार के विधायक रहे भरोसीलाल जाटव को टिकट नहीं दिया और हिण्डौन से अनीता जाटव को उम्मीदवार बनाया। अनीता जाटव ने चुनाव जीतकर सीट कांग्रेस के पास बरकरार रखी। इस तरह जाटव का प्रत्यक्ष विधानसभा सफर 2023 में समाप्त हुआ।

पांच जीत, चार हार और एक लंबी राजनीतिक यात्रा

भरोसीलाल जाटव का चुनावी रिकॉर्ड राजस्थान की उस राजनीति को दिखाता है, जहां एक नेता की पहचान सिर्फ लगातार जीत से नहीं बनती। 1980 से 2018 के बीच उन्होंने नौ विधानसभा चुनाव लड़े और पांच बार जीत दर्ज की। पांच जीत भी लगातार नहीं आईं—हर वापसी के पीछे एक चुनावी हार थी।

1980 में पहली जीत, 1990 में वापसी, 1998 में फिर जीत, 2008 में चौथी बार विधानसभा और 2018 में पांचवीं जीत—यह क्रम उनके राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता रहा।

2023 में चुनाव नहीं लड़ने के बाद भी हिण्डौन की स्थानीय राजनीति में उनका नाम पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं हुआ। लेकिन वर्तमान में उनके पास कोई निर्वाचित विधानसभा पद नहीं है।

भरोसीलाल जाटव की कहानी का सार यही है—किसान परिवार से निकला एक नेता, जिसने अलग-अलग राजनीतिक दौर देखे, कई चुनाव हारे, हर बार वापसी की और पांच बार हिण्डौन का प्रतिनिधित्व किया।

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