राजस्थान में घर बैठे गंभीर मरीजों को मिल रही देखभाल 

0
22
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर का विस्तार, बेड पर रहने वाले बुजुर्गों और असाध्य रोगियों को घर पर मिल रहीं स्वास्थ्य सेवाएं

जयपुर । गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और बिस्तर पर रहने को मजबूर बुजुर्गों के लिए राजस्थान में घर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की पहल का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में संचालित होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक तीन लाख से अधिक रोगियों को विभिन्न सेवाओं का लाभ मिलने की जानकारी राज्य सरकार ने दी है। इस पहल का उद्देश्य मरीजों को उपचार के साथ दर्द से राहत, मानसिक सहयोग और बेहतर जीवन-गुणवत्ता उपलब्ध कराना है।

सरकार के अनुसार, कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट, अल्जाइमर और अन्य गंभीर एवं असाध्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। खास तौर पर ऐसे मरीजों को राहत देने पर जोर है, जिनके लिए बार-बार अस्पताल पहुंचना कठिन होता है।

2.51 लाख मरीजों को ओपीडी, 41 हजार से अधिक को आईपीडी सेवाएं

राज्य सरकार के मुताबिक, प्रदेश के 98 जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों और सैटेलाइट अस्पतालों में पेलिएटिव केयर क्लीनिक स्थापित किए जा चुके हैं।

अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक इन सेवाओं के तहत करीब 2.51 लाख मरीजों को ओपीडी में परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया गया। इसी अवधि में 41 हजार से अधिक मरीजों को आईपीडी में भर्ती कर देखभाल दी गई। गंभीर रोगियों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराने के लिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे उन्हें परामर्श के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो सके।

चार महीने में 43 हजार मरीजों को घर पर देखभाल

होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर कार्यक्रम जुलाई 2025 में शुरू किया गया। इसके तहत बेड-रिडन मरीजों और बुजुर्गों को घर पर ही आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक करीब 43 हजार मरीजों को इस सुविधा का लाभ मिला। इनमें लगभग 20 हजार बुजुर्ग शामिल हैं।

घर पर उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं में नर्सिंग देखभाल, फिजियोथेरेपी, आवश्यक दवाइयां और मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक परामर्श शामिल हैं। इससे मरीजों के परिवारों को भी देखभाल के दौरान चिकित्सकीय सहयोग मिल रहा है।

‘राहत की किरण’ वाहन से मरीजों तक पहुंच रही टीम

होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को प्रभावी बनाने के लिए ‘राहत की किरण’ वाहन के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों की टीम मरीजों के घर पहुंचती है। टीम में नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट और संबंधित क्षेत्र की एएनएम अथवा आशा कार्यकर्ता शामिल रहती हैं।

स्वास्थ्यकर्मी मरीज की जरूरत के अनुसार देखभाल उपलब्ध कराते हैं। आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से टेली-परामर्श की सुविधा भी दी जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य गंभीर रोगियों को घर पर ही जरूरी स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराना है।

57 हजार केयर गिवर्स को प्रशिक्षण

सरकार ने पेलिएटिव केयर सेवाओं के विस्तार के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया है। जारी जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 57 हजार केयर गिवर्स को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

इसके अलावा लगभग 10 हजार एएनएम, 21 हजार से अधिक आशा कार्यकर्ताओं और करीब 10 हजार कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (सीएचओ) को भी प्रशिक्षित किया गया है। सरकार का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक इन सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है।

गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तार की तैयारी

राज्य सरकार का लक्ष्य पेलिएटिव केयर को बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना है। इससे गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को उनकी जरूरत के अनुरूप समय पर उपचार, दर्द से राहत और देखभाल मिल सकेगी।

होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर का महत्व उन परिवारों के लिए विशेष है, जहां मरीज की लगातार देखभाल की जरूरत होती है और अस्पताल तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। घर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से मरीज को परिचित माहौल में देखभाल मिल सकती है और परिजनों को भी प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग प्राप्त होता है।

 

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here