50 हजार गोसेवकों की हुंकार, गौशालाओं को 400 करोड़ का विशेष पैकेज

0
28
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

गौशालाओं को  विशेष पैकेज, रिकवरी नहीं करेगी सरकार

गौ अधिकार महासम्मेलन में अनुदान, पानी और भूमि आवंटन के मुद्दे गूंजे

जयपुर। राजस्थान में गोवंश संरक्षण और गौशालाओं की समस्याओं को लेकर शुक्रवार को टोंक रोड सांगानेर स्थित श्री पिंजरापोल गौशाला में गौ अधिकार हुंकार रैली एवं महासम्मेलन आयोजित किया गया। राजस्थान गोसेवा समिति के बैनर तले हुए इस आयोजन में आयोजकों ने प्रदेशभर से 50 हजार से अधिक गोसेवकों और प्रतिनिधियों के शामिल होने का दावा किया। महासम्मेलन में गौशालाओं के लंबित अनुदान, ऑडिट रिकवरी के नाम पर वसूली गई करीब 100 करोड़ रुपये की राशि, पानी की व्यवस्था और भूमि आवंटन जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।

महासम्मेलन में द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज और मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास जी महाराज ने गोसेवा एवं गोवंश संरक्षण के महत्व पर संबोधित किया। कार्यक्रम में संत-महात्माओं और गोशाला संचालकों ने सरकार से गौशालाओं की समस्याओं का स्थायी समाधान करने की मांग की। आयोजकों के अनुसार, प्रदेश की करीब 4200 से 4300 गोशालाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। लगभग 500 से 700 संत-महात्माओं की उपस्थिति भी रही।

सरकार ने दिया 400 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का भरोसा

महासम्मेलन में राज्य सरकार की ओर से मंत्री केके बिश्नोई और जोगाराम कुमावत शामिल हुए। अखिल भारतीय गौ सेवा सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक अतुल गुप्ता ने बताया कि सरकार ने गौशालाओं के लिए तीन महीने के विशेष पैकेज के तहत 400 करोड़ रुपये देने की जानकारी दी है। इसके साथ ही अप्रैल से जुलाई तक चार महीने का अनुदान अग्रिम देने का आश्वासन दिया गया है।

अतुल गुप्ता के मुताबिक, सरकार ने गौशालाओं से बकाया राशि की रिकवरी नहीं करने की बात भी कही है। गौशालाओं से जुड़ी विभिन्न मांगों और समस्याओं पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इन आश्वासनों को महासम्मेलन में उठाए गए प्रमुख मुद्दों पर सरकार की ओर से महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

अनुदान में देरी और 100 करोड़ की रिकवरी पर उठे सवाल

राजस्थान गोसेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष महंत गोविन्दराम शास्त्री ने कहा कि गोसेवा को लेकर सरकार की सोच सकारात्मक है, लेकिन योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की हजारों गौशालाएं निराश्रित गोवंश की देखभाल कर रही हैं। अनुदान मिलने में देरी और संसाधनों की कमी से उनके संचालन में कठिनाइयां आती हैं।
उन्होंने गौशालाओं को नियमित अनुदान देने के लिए निश्चित कैलेंडर बनाने, लंबित मामलों का निस्तारण करने और अधिकारियों-कर्मचारियों को गोवंश के प्रति संवेदनशील बनाने की आवश्यकता जताई।
समिति के प्रदेश महामंत्री सीए बीपी क्याल ने कहा कि अनुदान में देरी का सीधा असर चारे, पानी, पशु चिकित्सा और गौशालाओं के दैनिक संचालन पर पड़ता है। उन्होंने ऑडिट रिकवरी के मामलों की उपलब्ध दस्तावेजों और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर समीक्षा करने की मांग की। उनका कहना था कि अनुदान प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होने से गौशाला संचालकों को राहत मिलेगी।
समिति के मुख्य सलाहकार सिंह शिवलाव ने कहा कि पिछले करीब डेढ़ वर्ष में गौशालाओं के संचालन से जुड़ी परेशानियां बढ़ी हैं। कई गौशालाओं का अनुदान लंबित है। वहीं, ऑडिट रिकवरी के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये की राशि निकाले जाने के मामले की समीक्षा जरूरी है। इस मुद्दे पर सरकार से राहत देने की मांग की गई।

पानी और भूमि आवंटन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा

महासम्मेलन में गर्मी और अकाल जैसी परिस्थितियों को देखते हुए गौशालाओं में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने तथा पशु शिविर शुरू करने की मांग की गई। समिति ने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ के निर्देशों का हवाला देते हुए पाइपलाइन, ट्यूबवेल या टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

इसके अलावा, जरूरत के अनुसार गौशालाओं को भूमि आवंटित करने, लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करने और गोवंश की देखभाल के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।

शंकराचार्य और मलूक पीठाधीश्वर ने दिया गोसेवा का संदेश

शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज और मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास जी महाराज ने अपने संबोधन में गोसेवा को भारतीय संस्कृति, करुणा और सामाजिक दायित्व से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने गोवंश की देखभाल के लिए समाज और शासन की सहभागिता को आवश्यक बताते हुए गौशालाओं में चारा, पानी, चिकित्सा और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

महासम्मेलन में गोमाता की जय के जयकारों के बीच गोवंश संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया गया। आयोजन के दौरान गोसेवकों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाईं।

तीन महीने में कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी नजरें

गौ अधिकार हुंकार रैली में उठे मुद्दों और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद अब  गौशाला संचालकों की नजरें अनुदान जारी करने, चार महीने का अग्रिम अनुदान देने, रिकवरी से राहत और पानी-भूमि से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर टिकी हैं। सरकार की ओर से गठित की जाने वाली कमेटी की रिपोर्ट अगले तीन महीने में आने की बात कही गई है। ऐसे में गौशालाओं से जुड़े संगठनों को उम्मीद है कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here