लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
भारी छूट, कैशबैक और लिमिटेड टाइम डील के लालच में न करें जल्दबाजी; फर्जी वेबसाइट और नकली ऐप से खाली हो सकता है बैंक खाता
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क | जयपुर। (रूपनारायण सांवरिया)
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन खरीदारी के दौरान आकर्षक ऑफर्स का लालच साइबर ठगी का कारण बन सकता है। फ्लिपकार्ट की ‘बिग बिलियन डेज’ और अमेजन की ‘ग्रेट इंडियन फेस्टिवल’ जैसी बड़ी ई-कॉमर्स सेल के दौरान साइबर अपराधियों की धोखाधड़ी से आमजन को बचाने के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (R4C) ने एडवाइजरी जारी की है।
महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जारी एडवाइजरी में ऑनलाइन खरीदारों को फर्जी वेबसाइट, नकली मोबाइल ऐप, संदिग्ध लिंक और भुगतान से जुड़े साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि बड़ी फेस्टिवल सेल के दौरान साइबर ठग भारी छूट, सीमित समय के ऑफर और आकर्षक कैशबैक का लालच देकर लोगों को निशाना बना सकते हैं। ‘आज ही खरीदें’, ‘केवल दो मिनट बाकी’ और ‘अभी भुगतान करें, वरना ऑफर खत्म’ जैसे संदेशों के जरिए ग्राहकों पर तुरंत फैसला लेने का दबाव बनाया जाता है। जल्दबाजी में बिना जांच-पड़ताल किए गए भुगतान से आर्थिक नुकसान हो सकता है।
ऑनलाइन खरीदारी में इन 11 सावधानियों का रखें ध्यान
1. ऑफर की पुष्टि करें: भारी छूट देखकर तुरंत भुगतान न करें। संबंधित ई-कॉमर्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाकर ऑफर की जांच करें।
2. अनजान लिंक से बचें: व्हाट्सऐप, एसएमएस, टेलीग्राम या सोशल मीडिया पर मिले संदिग्ध लिंक से सीधे खरीदारी न करें।
3. वेबसाइट का डोमेन जांचें: फर्जी वेबसाइट असली वेबसाइट से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल कर सकती हैं। HTTPS या ताले का निशान होने से वेबसाइट के वास्तविक होने की गारंटी नहीं मिलती।
4. आधिकारिक स्टोर से ऐप डाउनलोड करें: मोबाइल ऐप केवल गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से डाउनलोड करें। रिफंड या ऑफर के नाम पर भेजे गए अनजान ऐप इंस्टॉल न करें।
5. यूपीआई पिन और क्यूआर कोड से सतर्क रहें: यूपीआई पिन पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान अधिकृत करने के लिए होता है। रिफंड या कैशबैक के नाम पर पिन डालने अथवा क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए कहे जाने पर सावधान रहें।
6. कस्टमर केयर नंबर की पुष्टि करें: गूगल सर्च या सोशल मीडिया पर मिले नंबर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर दिए गए सहायता विकल्पों का इस्तेमाल करें।
7. रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें: किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर AnyDesk, TeamViewer या अन्य रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें। स्क्रीन शेयरिंग के दौरान बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा करने से बचें।
8. कार्ड और बैंक खाते की सुरक्षा करें: ऑनलाइन खरीदारी के लिए कम लिमिट वाले कार्ड या अलग बैंक खाते का इस्तेमाल करने पर विचार करें। कार्ड की ऑनलाइन और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन सुविधाएं जरूरत के अनुसार ही चालू रखें।
9. बैंकिंग अलर्ट सक्रिय रखें: बैंक खातों और कार्ड के एसएमएस तथा ईमेल अलर्ट चालू रखें। ई-कॉमर्स, ईमेल और बैंकिंग खातों के लिए अलग-अलग मजबूत पासवर्ड बनाएं।
10. ऑर्डर की स्थिति आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर देखें: डिलीवरी, रिफंड या कैशबैक से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का उपयोग करें। किसी अनजान व्यक्ति के निर्देश पर अतिरिक्त ऐप इंस्टॉल न करें।
11. सार्वजनिक वाई-फाई पर भुगतान से बचें: मॉल, कैफे और एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों के वाई-फाई नेटवर्क पर बैंकिंग या बड़ी राशि के लेन-देन करने से बचें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
यदि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान खाते से पैसे कट जाएं या कोई संदिग्ध लेन-देन दिखाई दे, तो तुरंत बैंक अथवा कार्ड जारीकर्ता से संपर्क करें। लेन-देन की तारीख, राशि, UTR या ट्रांजेक्शन आईडी, संदिग्ध फोन नंबर, वेबसाइट का यूआरएल और स्क्रीनशॉट जैसे साक्ष्य सुरक्षित रखें।
शिकायत के लिए इन माध्यमों का उपयोग करें:
- साइबर हेल्पलाइन: 1930
- राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल: https://cybercrime.gov.in
- राजस्थान पुलिस साइबर हेल्पडेस्क: 9256001930 / 9257510100
- पुलिस सहायता: नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।
सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव
राजस्थान पुलिस ने आमजन को सलाह दी है कि आकर्षक ऑफर्स के दबाव में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन या कार्ड संबंधी गोपनीय विवरण किसी के साथ साझा न करें। खरीदारी से पहले वेबसाइट की प्रामाणिकता जांचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित एजेंसी को दें।























































