जोधपुर में 12 से 15 नवंबर तक होगा ‘मरू निनाद’ घोष शिविर 

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

नागौर में 11 अक्टूबर को निकलेगा घोष संचलन, नगर सेठ बंशीवाला मंदिर में प्रथम निमंत्रण अर्पित करेंगे स्वयंसेवक

प्रांत के 21 जिलों और जोधपुर महानगर के स्वयंसेवक लेंगे भाग, पांच हजार घोषवादकों के समवेत कार्यक्रम का लक्ष्य

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क | प्रदीप कुमार डागा

नागौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जोधपुर प्रांत की ओर से 12 से 15 नवंबर तक ‘मरू निनाद’ प्रांत घोष शिविर का आयोजन किया जाएगा। जोधपुर के शिकारपुरा स्थित संत राजारामजी पावन तीर्थ धाम में होने वाले इस आयोजन में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का सान्निध्य और मार्गदर्शन प्राप्त होगा। शिविर में प्रांत के 21 जिलों और जोधपुर महानगर के स्वयंसेवक भाग लेंगे। आयोजन के लिए पांच हजार घोषवादकों के समवेत कार्यक्रम का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस आयोजन के निमित्त नागौर जिला मुख्यालय पर रविवार, 11 अक्टूबर को घोष संचलन निकाला जाएगा। स्वयंसेवक घोष वादन के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए काठड़िया चौक स्थित नगर सेठ बंशीवाला मंदिर पहुंचेंगे। यहां संघ पदाधिकारियों की ओर से मरू निनाद शिविर का पहला निमंत्रण नगर सेठ बंशीवाला के श्रीचरणों में अर्पित किया जाएगा।

माधव निलयम से शुरू होगा घोष संचलन

नागौर में 11 अक्टूबर को घोष निमंत्रण कार्यक्रम माधव निलयम से प्रारंभ होगा। संचलन नकास दरवाजे सहित शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों से होते हुए बंशीवाला मंदिर पहुंचेगा। मंदिर परिसर में स्वयंसेवक घोष वादन की प्रस्तुतियां देंगे।

कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत के रागों और पारंपरिक तालों पर आधारित घोष रचनाएं प्रस्तुत की जाएंगी। शंख, वेणु यानी बांसुरी, आनक यानी ड्रम और श्रृंग जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनें कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेंगी।

भारतीय शास्त्रीय रचनाओं का करेंगे अभ्यास

मरू निनाद शिविर की तैयारी के तहत नागौर जिले में स्वयंसेवक नियमित रूप से घोष वादन का अभ्यास कर रहे हैं। जिला मुख्यालय के चार मंडलों की 16 बस्तियों सहित नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह-शाम अभ्यास जारी है। नागौर विभाग के नागौर, मेड़ता और डीडवाना क्षेत्र के स्वयंसेवकों की भी शिविर में सहभागिता रहेगी।

अभ्यास के दौरान संघ के घोष में प्रयुक्त आनक, पणव, शंख, झांझ, वेणु, त्रिभुज और श्रृंग सहित विभिन्न वाद्ययंत्रों पर रचनाओं का अभ्यास किया जा रहा है। इनमें स्वागत प्रणाम, ध्वज प्रणाम, श्रीराम, सागर, वीरश्री, चेतक, मीरा, जननी, भीमपलासी, भूप, शिवरंजनी, श्रीनिवास, शरावती, मलयप्रभा, मंगला और प्रताप जैसी रचनाएं शामिल हैं।

शिविरार्थी भारतीय शास्त्रीय संगीत पर आधारित इन रचनाओं का सामूहिक अभ्यास करेंगे। समापन कार्यक्रम में घोष वादन के साथ समता का प्रदर्शन भी प्रस्तावित है।

छह साल पहले बनी थी आयोजन की योजना

संघ के जोधपुर प्रांत में मरू निनाद शिविर की योजना लगभग छह वर्ष पहले बनाई गई थी। उस समय श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या से संबंधित ऐतिहासिक घटनाक्रम के कारण आयोजन को स्थगित करना पड़ा था। अब संघ के शताब्दी वर्ष के बाद इस शिविर को आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

आयोजकों के अनुसार, शिविर का उद्देश्य घोष वादन की परंपरा, भारतीय शास्त्रीय संगीत और सामूहिक अभ्यास के माध्यम से स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना है। नवंबर में होने वाले मुख्य आयोजन में बड़ी संख्या में घोषवादकों की सहभागिता प्रस्तावित है।

समापन कार्यक्रम में आम नागरिकों को भी आमंत्रण

मरू निनाद शिविर के समापन अवसर पर डॉ. मोहन भागवत का उद्बोधन होगा। इस कार्यक्रम में आम नागरिकों को भी शामिल होने और उनका मार्गदर्शन सुनने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

नागौर में 11 अक्टूबर को होने वाला घोष संचलन इसी प्रांतीय आयोजन की तैयारियों का हिस्सा है। नगर सेठ बंशीवाला मंदिर में प्रथम निमंत्रण अर्पित करने के साथ स्वयंसेवक शहरवासियों तक शिविर का संदेश पहुंचाएंगे।

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