लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पीड़ित पक्ष ने उठाए पुलिस जांच पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
जयपुर। जयपुर में भू-माफियाओं द्वारा कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कीमती भूखंडों को हड़पने की साजिश और पुलिस जांच में देरी का मामला सामने आया है। इस संबंध में शनिवार को पिंक सिटी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओंकार मीणा (सीबीआई कार्मिक)और उनके बड़े भाई सुखदेव मीणा ने अपनी आपबीती बताते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच किसी उच्च अधिकारी से करवाने और कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओंकार मीणा ने बताया कि वर्ष 1994 में उनके पिता ने शिवशंकर हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसाइटी, जयपुर से उनके और उनके बड़े भाई सुखदेव मीणा के नाम पर 200-200 वर्गगज के दो प्लॉट खरीदे थे। आरोप है कि इन प्लॉटों को हड़पने की नीयत से जितेंद्र भंडारी, राकेश कुमार व्यास और सतीश दलाल ने वर्ष 2008 का एक कथित फर्जी एवं कूटरचित इकरारनामा तैयार किया।
इकरारनामे की प्रमाणिकता पर उठाए सवाल
ओंकार मीणा और सुखदेव मीणा का आरोप है कि संबंधित इकरारनामे में कई ऐसी विसंगतियां हैं, जो उसकी प्रमाणिकता पर सवाल खड़े करती हैं। उनका कहना है कि इकरारनामे में ओंकार मीणा की उम्र ऐसी थी, जब वे नाबालिग थे। इसके अलावा दस्तावेज में उनके हस्ताक्षर हिंदी में दर्शाए गए हैं, जबकि उनके अनुसार वे हमेशा अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हैं। पीड़ित पक्ष का यह भी दावा है कि दस्तावेज में पते, आयु, क्रेता का नाम और राशि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां टाइप किए गए प्रारूप में बाद में हाथ से जोड़ी गई हैं।

जेडीए में लीजडीड के आवेदन के दौरान सामने आया मामला
पीड़ितों के अनुसार, जनवरी 2020 में जब उन्होंने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में अपने प्लॉटों की लीजडीड प्राप्त करने के लिए आवेदन किया, तब कथित विवादित इकरारनामे की जानकारी सामने आई। उनका आरोप है कि वर्ष 2008 का बताया जा रहा यह दस्तावेज करीब 12 साल बाद वर्ष 2020 में जेडीए के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके बाद उन्होंने प्रतापनगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
सात साल से एफआईआर के निस्तारण का इंतजार
ओंकार मीणा के अनुसार, इस मामले में प्रतापनगर थाने में एफआईआर संख्या 69/2020 दर्ज कराई गई थी। इसमें आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी का उल्लेख है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि करीब सात साल बीतने के बावजूद मामले में अब तक अंतिम निस्तारण नहीं हुआ है। उन्होंने जांच की गति और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।
पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी ओर, इसी कथित विवादित इकरारनामे के आधार पर उनके परिवार के खिलाफ बजाज नगर थाने में मुकदमा संख्या 107/2021 दर्ज करवाया गया। उनके अनुसार, इस मामले का उपयोग उन्हें दबाव में लेने और डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है। पीड़ित पक्ष ने बताया कि यह प्रकरण वर्तमान में प्रतापनगर थाने में जांचाधीन है।
निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ओंकार मीणा और सुखदेव मीणा ने मांग की कि दोनों मामलों की जांच प्रतापनगर थाने से हटाकर किसी वरिष्ठ एवं निष्पक्ष अधिकारी को सौंपी जाए। साथ ही, कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बजाज नगर थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 107/2021 की भी निष्पक्ष समीक्षा करने और पर्याप्त आधार न मिलने पर नियमानुसार अंतिम रिपोर्ट (एफआर) प्रस्तुत करने की मांग की।





















































