उपराष्ट्रपति भवन में सूफी सौहार्द की गूंज, सैयद फख़र काज़मी चिश्ती की उपराष्ट्रपति से मुलाकात

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 
अजमेर दरगाह शरीफ से जुड़े सूफी संत ने शांति, एकता और भाईचारे पर की सार्थक चर्चा

रिपोर्ट: नितिन मेहरा


अजमेर/नई दिल्ली: भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ को मजबूत करते हुए अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़े सूफी संत सैयद फख़र काज़मी चिश्ती ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक उपराष्ट्रपति के विशेष निमंत्रण पर आयोजित की गई।


शांति और भाईचारे पर गहन चर्चा

करीब आधे घंटे तक चली इस मुलाकात में सैयद फख़र काज़मी चिश्ती के साथ उनके सुपुत्र एवं अधिवक्ता डॉ. सैयद राग़िब चिश्ती भी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान देश और वैश्विक स्तर पर शांति, एकता और सांप्रदायिक सौहार्द जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। चिश्ती साहब ने सूफी विचारधारा के मूल सिद्धांत ‘सुलह-ए-कुल’ (सभी के साथ शांति) का उल्लेख करते हुए समाज में आध्यात्मिक भाईचारे की अहम भूमिका पर जोर दिया।


अजमेर शरीफ आने का निमंत्रण

मुलाकात के दौरान सैयद फख़र काज़मी चिश्ती ने उपराष्ट्रपति को अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध अजमेर शरीफ दरगाह आने का आमंत्रण दिया।

उन्होंने उपराष्ट्रपति से दरगाह में ज़ियारत करने का आग्रह किया, जिसे सी. पी. राधाकृष्णन ने सहर्ष स्वीकार करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर चिश्ती साहब ने उन्हें पारंपरिक दस्तारबंदी (पगड़ी) और तबर्रुक भेंट कर सम्मानित किया।


सूफी संदेश का वैश्विक प्रभाव

गौरतलब है कि सैयद फख़र काज़मी चिश्ती लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों और विभिन्न राजनेताओं के माध्यम से शांति और मानवता का संदेश फैलाते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मुलाकातें न केवल देश की सांस्कृतिक और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करती हैं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विश्वास और सद्भाव को भी मजबूत बनाती हैं।


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