लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा | निर्मल गुप्ता
श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र, सूथड़ा में जैन धर्म के वर्तमान अवसर्पिणी काल के 14वें तीर्थंकर भगवान श्री 1008 अनंतनाथ भगवान का जन्म कल्याणक महामहोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना कर उनके जीवन चरित्र का स्मरण किया तथा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
तीर्थ क्षेत्र प्रबंध समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराना एवं संतु जैन ने बताया कि भगवान अनंतनाथ वर्तमान अवसर्पिणी काल के चौदहवें तीर्थंकर हैं। जैन दर्शन में “अनंत” शब्द असीम ज्ञान, अनंत दर्शन और आध्यात्मिक मुक्ति की असीमता का प्रतीक माना जाता है। भगवान अनंतनाथ ने अपने समस्त कर्मों का क्षय कर सिद्ध पद अर्थात मोक्ष की प्राप्ति की थी।
उन्होंने बताया कि भगवान अनंतनाथ का जन्म इक्ष्वाकु वंश में अयोध्या नगरी के राजपरिवार में ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी (बारस) के दिन हुआ था। उनके पिता राजा सिंहसेन तथा माता महारानी सुयशा देवी (जयश्यामा) थीं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार उन्होंने दीर्घकाल तक न्यायपूर्ण शासन किया तथा बाद में अपने पुत्र अनंतविजय को राजपाट सौंपकर वैराग्य धारण कर लिया। कठोर तपस्या के पश्चात उन्हें कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई और अंततः उन्होंने समस्त कर्मों का नाश कर सिद्धालय में मोक्ष प्राप्त किया।
महामहोत्सव के तहत शास्त्रीजी के निर्देशन में मंगलाष्टक के साथ नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। वार्षिक शांतिधारा का सौभाग्य जयपुर निवासी रमेशचंद रौनक सर्राफ को प्राप्त हुआ। वहीं पांडुकशिला पर शांतिधारा बाबूलाल कासलीवाल, मनीष कुमार एवं कमल कुमार जैन, उनियारा द्वारा संपन्न कराई गई।
इसके पश्चात देव-शास्त्र पूजा, चौबीसी भगवान की मूलनायक पूजा तथा भगवान अनंतनाथ की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान के जन्म कल्याणक का उत्सव हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया।
सायंकाल भक्तामर संयोजक हुकुमचंद शहर वाले एवं नरेंद्र जैन बनेठा के सान्निध्य में शुक्रवार भक्तामर मंडल, उनियारा द्वारा भक्तामर दीपार्चना का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान अनंतनाथ के आदर्शों को आत्मसात करने तथा धर्म, संयम एवं आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। आयोजन पूरे दिन धार्मिक वातावरण और भक्तिमय उल्लास के बीच संपन्न हुआ।
















































