लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
किसी को आज भी पति के लौटने का इंतजार, तो किसी को परिवार के अपनाने की उम्मीद; दर्द के बीच भी रिश्तों के प्रति अटूट विश्वास ने किया भावुक
भरतपुर। करवा चौथ पर जहां सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखा, वहीं भरतपुर स्थित मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन ‘अपना घर’ आश्रम में इस पर्व की तस्वीर ने हर किसी को भावुक कर दिया। आश्रम में रह रहीं 150 से अधिक प्रभुजन महिलाओं ने अपने पतियों की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इनमें कई महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें उनके परिवार ने छोड़ दिया है या जो लंबे समय से अपने पति और घर लौटने की उम्मीद लगाए बैठी हैं।
एक ओर बाजारों में करवा, पूजन सामग्री और श्रृंगार के सामान की खरीदारी के लिए भीड़ रही, वहीं ब्यूटी पार्लरों में भी महिलाओं की रौनक दिखाई दी। दूसरी ओर ‘अपना घर’ आश्रम में करवा चौथ का उत्सव खुशियों के साथ उन महिलाओं के दर्द और विश्वास की कहानी भी बयां कर रहा था, जिनके जीवन में अपनों की दूरी आज भी बरकरार है।
नौ साल से पति का इंतजार, फिर भी नहीं टूटा विश्वास
मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी नविता दीक्षित की कहानी इस आयोजन के सबसे भावुक पहलुओं में से एक रही। नविता ने बताया कि वह भोपाल में चार साल तक कंप्यूटर टीचर के रूप में काम कर चुकी हैं। नौकरी छोड़ने के बाद शुरुआत में ससुराल में सब ठीक रहा, लेकिन बाद में उन्हें ताने दिए जाने लगे और नौकरी करने के लिए कहा गया। रोजगार की तलाश के दौरान वह ‘अपना घर’ आश्रम पहुंच गईं।
नविता को आश्रम में रहते हुए नौ साल हो चुके हैं। इस दौरान पति से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया और ससुराल पक्ष से भी उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बावजूद वह हर साल पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
नविता ने भावुक होकर कहा कि पति उन्हें लेने आएं या नहीं, वह उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करती हैं। उनके साथ बिताए खूबसूरत पलों को वह आज भी याद करती हैं और उन्हीं यादों के सहारे व्रत रखती हैं।
अमरीन को आज भी पति के लौटने की उम्मीद
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की रहने वाली अमरीन ने बताया कि उन्होंने प्रेम विवाह किया था। मानसिक परेशानी के बाद भटकते हुए वह ‘अपना घर’ आश्रम पहुंच गईं। इस बार उनका पहला करवा चौथ व्रत है।
अमरीन के मुताबिक, उनके पिता का निधन हो चुका है और भाई-बहन अभी छोटे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति उन्हें अपने साथ ले जाना चाहते हैं, लेकिन ससुराल पक्ष इसके लिए तैयार नहीं है। इसके बावजूद अमरीन को भरोसा है कि उनके पति उन्हें आश्रम से घर ले जाने के लिए प्रयास जारी रखेंगे।
दूसरी शादी के बाद भी पति के साथ रहने को तैयार प्रमिला
झारखंड की रहने वाली प्रमिला की कहानी भी रिश्तों के प्रति उनके विश्वास को सामने लाती है। उनकी शादी दिल्ली के संगम विहार में हुई थी। प्रमिला को ‘अपना घर’ आश्रम में रहते हुए छह साल हो चुके हैं। उनके अनुसार, उनके पति दूसरी शादी कर चुके हैं। पति को उनकी स्थिति की जानकारी है और आश्वासन भी मिला है, लेकिन अब तक उन्हें लेने कोई नहीं आया।
प्रमिला ने बताया कि वह अपने पति के साथ उनकी दूसरी पत्नी के रहते हुए भी रहने को तैयार हैं। उनके भाई और पिता के नहीं होने के कारण उन्हें जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उन्हें अपने घर लौटने की उम्मीद है।
कई दिनों से चल रही थी करवा चौथ की तैयारी
आश्रम की संचालिका डॉ. माधुरी भारद्वाज ने बताया कि करवा चौथ के आयोजन के लिए कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। महिलाओं ने मेहंदी लगवाने, श्रृंगार करने और अन्य तैयारियों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। सुबह से ही 150 से अधिक महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना की।
डॉ. भारद्वाज ने कहा कि इन महिलाओं के मन में अपने पतियों के प्रति आज भी गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। कई महिलाओं को पता है कि उनके पति दूसरी शादी कर चुके हैं, कुछ के तलाक हो चुके हैं और कुछ को उनके पति अपने साथ रखने के लिए तैयार नहीं हैं। कई मामलों में बातचीत और आश्वासन के बावजूद महिलाएं अपने परिवार तक नहीं लौट पाई हैं।
‘परिवार का सदस्य बीमार हो तो उसे संभालना चाहिए, छोड़ना नहीं’
डॉ. माधुरी भारद्वाज ने भावुक अपील करते हुए कहा कि परिवार की जिम्मेदारी केवल सुख के समय साथ रहने तक सीमित नहीं है। यदि परिवार का कोई सदस्य बीमार या असहाय हो जाए, तो उसे सहारा देना चाहिए, न कि अकेला छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इन महिलाओं के परिवार और पति उनकी परिस्थितियों को समझेंगे तथा उन्हें सम्मान और अपनापन देने के लिए आगे आएंगे। उनके मुताबिक, आश्रम में रह रहीं महिलाओं की सबसे बड़ी इच्छा अपने परिवार के बीच लौटने और सम्मान के साथ जीवन बिताने की है।
करवा चौथ का यह आयोजन एक ओर भारतीय परंपरा और वैवाहिक रिश्तों के प्रति आस्था का प्रतीक बना, तो दूसरी ओर उन महिलाओं की पीड़ा भी सामने लाया, जो अपनों से दूर रहने के बावजूद उनके लिए मंगलकामना कर रही हैं। इन महिलाओं की कहानियां समाज के सामने यह सवाल भी छोड़ती हैं कि मुश्किल वक्त में अपनों का साथ और मानवीय संवेदनाएं कितनी जरूरी हैं।






















































