नागौर को जिला एवं सेशन न्यायालय दिलाने की मुहिम तेज

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 
अधिवक्ता संघ की पहल, उच्च स्तर तक पहुंचाई गई न्यायिक मांगे


नागौर (प्रदीप कुमार डागा): जिला अधिवक्ता संघ नागौर ने अधिवक्ताओं के अधिकारों और न्यायिक सुविधाओं के विस्तार को लेकर एक बार फिर मजबूत पहल की है। संघ ने नागौर जिला मुख्यालय पर जिला एवं सेशन न्यायालय की स्थापना सहित विभिन्न आवश्यक न्यायालयों के गठन की मांग को उच्च स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचाया है।


उच्च अधिकारियों से की मुलाकात

जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष डॉ. पवन श्रीमाली एवं नवीन न्यायालय संघर्ष समिति के सह-संयोजक महावीर विश्नोई (एडवोकेट) ने संयुक्त रूप से इंस्पेक्टिंग जज नागौर प्रमिल कुमार माथुर, प्रमुख शासन सचिव (विधि) राघवेंद्र काछवाल, न्यायाधीश सी.पी. श्रीमाली, न्यायाधीश विनोद कुमार भारवानी सहित अन्य वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की।

इस दौरान नागौर की न्यायिक स्थिति, अधिवक्ताओं की समस्याओं और आवश्यक न्यायालयों की जरूरतों को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया गया।


जिला एवं सेशन न्यायालय की प्रमुख मांग

प्रेस को जारी बयान में बताया गया कि नागौर जिला मुख्यालय पर आज भी जिला एवं सेशन न्यायालय का अभाव है, जिससे अधिवक्ताओं और आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से रखते हुए जिला एवं सेशन न्यायालय की स्थापना को प्राथमिक मांग के रूप में रखा गया।


अन्य न्यायालयों की भी मांग

अधिवक्ता संघ ने इसके साथ ही कई अन्य न्यायालयों की स्थापना की मांग भी रखी, जिनमें शामिल हैं:

  • पारिवारिक न्यायालय
  • एन.आई. एक्ट न्यायालय
  • एससी/एसटी न्यायालय
  • ग्राम न्यायालय
  • कमर्शियल न्यायालय
  • एनडीपीएस न्यायालय
  • ए.एम.सी.टी. न्यायालय

साथ ही प्रस्तावित न्यायालय परिसर हेतु आवंटित भूमि पर शीघ्र चारदीवारी निर्माण कराने की मांग भी की गई, ताकि भविष्य में न्यायालय स्थापना में कोई बाधा न आए।


सीमित संसाधनों में प्रभावी पहल

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता संघ ने अनावश्यक खर्च से बचते हुए केवल दो प्रतिनिधियों के माध्यम से यह महत्वपूर्ण ज्ञापन प्रस्तुत किए। इससे अधिकारियों ने गंभीरता से सभी बिंदुओं को सुना और पर्याप्त समय दिया।


अधिवक्ता हित और न्याय व्यवस्था पर जोर

डॉ. पवन श्रीमाली ने कहा कि अधिवक्ता संघ सदैव अधिवक्ताओं के हितों और न्याय व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्वार्थ या प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर आमजन और अधिवक्ताओं के हित में कार्य करना ही उनका लक्ष्य है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास केवल एक चरण है और आगे भी ज्ञापन, वार्ता और अन्य विधिक प्रयास लगातार जारी रहेंगे।


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