लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
धर्म और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ जैन समुदाय का पावन पर्व
उनियारा (दुर्योधन मयंक)। उपखंड क्षेत्र के सुथड़ा स्थित श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र में देवाधिदेव अष्टान्हिका महापर्व का तृतीय दिवस भक्तिभाव और धर्ममय वातावरण में मनाया गया।
प्रबंध समिति के महावीर प्रसाद पराणा और बाबूलाल कासलीवाल ने बताया कि अष्टान्हिका महापर्व जैन धर्म का अत्यंत पवित्र आठ दिवसीय पर्व है, जिसे वर्ष में तीन बार मनाया जाता है। यह पर्व मुख्यतः देव शाश्वत तीर्थंकर जिनालय की आराधना, साधना, पूजन और आत्मशुद्धि का अवसर प्रदान करता है।
जैन आगमों के अनुसार, इस काल में देवलोकों में स्थित शाश्वत जिनालयों में देवगण विशेष पूजन-अर्चन करते हैं। पृथ्वी लोक पर श्रावक-श्राविकाएं प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण, विधान, स्वाध्याय, जप और तप द्वारा धर्मलाभ अर्जित करते हैं। धर्माचार्यों का कहना है कि अष्टान्हिका पर्व आत्मा को कर्मबंधन से मुक्त करने और आंतरिक शुद्धि, समता व वीतरागता की भावना जागृत करने का संदेश देता है।
इस अवसर पर शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में मंगलाष्टक, नित्य अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया। तीर्थरक्षक महावीर प्रसाद, जिनेन्द्र कुमार, रमेशचंद, रौनक सर्राफ, त्रिलोकचंद, ललित कुमार, मनोज कुमार दूनी सहित अन्य धर्माचार्यों ने क्रमशः शांतिधारा एवं पूजा-अर्चना संपन्न करवाई।
इसके बाद देव शास्त्र पूजा, चौबीस भगवान की मुलनायक भगवान की पूजा, पंचमेरु और नंदीश्वरद्वीप की पूजा कर सिद्धों की आराधना के साथ अष्टान्हिका महापर्व का तृतीय दिवस पूर्ण हुआ। शाम 6:30 बजे श्रेष्ठी परिवार एवं गुरुवार भक्तामर मंडल बनेठा द्वारा भक्तामर दीपार्चना का आयोजन सानंद संपन्न हुआ।
यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर है, बल्कि आत्मजागरण, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का भी महत्त्वपूर्ण अवसर माना जाता है।


















































