मेडिकल कॉलेजों में मान्यता की होड़ से मेडिकल साइंस की साख दांव पर- गहलोत

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

मेडिकल कॉलेजों में मान्यता की होड़ 

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश सहित देशभर के मेडिकल कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं और पर्याप्त फैकल्टी के अभाव के बावजूद मान्यता हासिल करने की कथित होड़ पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पर्याप्त संसाधनों के बिना मेडिकल कॉलेजों को मिल रही मान्यताओं से भारत में मेडिकल साइंस और चिकित्सा शिक्षा की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की मान्यता लेने की होड़ है, लेकिन इसके साथ जुड़े बुनियादी और गंभीर सवालों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने निजी और सरकारी दोनों संस्थानों में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई।

निजी मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने निजी संस्थानों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगह मेडिकल कॉलेज तो खुल गए, लेकिन उनके पास पर्याप्त और उचित अस्पताल नहीं हैं। कहीं अस्पताल उपलब्ध है तो पर्याप्त मरीज नहीं हैं, जिससे मेडिकल छात्रों को जरूरी प्रैक्टिकल अनुभव नहीं मिल पाता।

उन्होंने फैकल्टी की कमी का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि कई संस्थानों में पढ़ाने के लिए पर्याप्त योग्य फैकल्टी उपलब्ध नहीं है। गहलोत के मुताबिक, मेडिकल शिक्षा में केवल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलना भी जरूरी है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी फैकल्टी की कमी

गहलोत ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के निरीक्षण के दौरान कहीं-कहीं बाहर से फैकल्टी बुलाकर औपचारिकता पूरी की जाती है और इसके बाद मान्यता हासिल कर ली जाती है।

उन्होंने कहा कि मेडिकल जैसे संवेदनशील पेशे में संख्या नहीं बल्कि गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि हर मेडिकल डिग्री के पीछे किसी न किसी मरीज की जिंदगी और स्वास्थ्य का सवाल जुड़ा हुआ है।

भ्रष्टाचार और व्यवस्था पर भी सवाल

गहलोत ने कहा कि यह समस्या केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में चिकित्सा शिक्षा की व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। उन्होंने निजी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी देने में कथित रिश्वतखोरी के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रकरण व्यवस्था की गंभीरता को सामने लाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में जहां बड़ी संख्या में कुशल डॉक्टरों की जरूरत है, वहां भावी डॉक्टरों की योग्यता और प्रशिक्षण पर सवाल उठना बेहद चिंताजनक है।

केंद्र, NMC और राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार, NMC और राज्य सरकारों से मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्थाओं को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारों को स्पष्ट करना चाहिए कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी और बुनियादी सुविधाएं सिर्फ कागजों पर हैं या वास्तव में धरातल पर भी उपलब्ध हैं।

गहलोत ने सवाल उठाया कि यदि चिकित्सा शिक्षा जैसे गंभीर क्षेत्र में गुणवत्ता से समझौता जारी रहा तो वैश्विक स्तर पर भारत के मेडिकल साइंस और चिकित्सा शिक्षा की साख पर इसका क्या असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों की कथित चुप्पी स्वास्थ्य तंत्र के लिए चिंता का विषय है।

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