लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बोले- गोडावण राजस्थान की जैव विविधता का प्रतीक, संरक्षण के साथ विकास की राह पर बढ़ रहा प्रदेश
जयपुर । राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण की दिशा में शनिवार को एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रामदेवरा में नवनिर्मित गोडावण री-वाइल्डिंग एवियरी (पुनर्स्थापन पक्षीगृह) का उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोडावण राजस्थान की प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से इसके संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि गोडावण के लिए प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप इस विशेष पक्षीगृह के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 9.25 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
प्राकृतिक आवास में लौटने से पहले अनुकूलन का अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामदेवरा में निर्मित री-वाइल्डिंग एवियरी भारत में अपनी तरह की अनूठी पहल है। इसमें कैप्टिव-ब्रेड गोडावण को खुले प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करने से पहले पर्याप्त उड़ान क्षेत्र और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल से गोडावण को स्वाभाविक व्यवहार विकसित करने और प्राकृतिक वातावरण में रहने के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी। गोडावण संरक्षण की यह पहल प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और इससे संरक्षण अभियान को नई दिशा मिलेगी।
29 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गोडावण के साथ-साथ राजस्थान की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी निरंतर काम कर रही है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत प्रदेश में 29 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण में सहयोग के लिए 38,622 वन मित्रों का पंजीयन किया गया है। वहीं अजमेर के सौंखनिया क्षेत्र में खरमोर पक्षी के संरक्षण के लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के साथ एमओयू किया गया है। उदयपुर शहर को रामसर वेटलैंड सिटी घोषित किया गया है।
जल संरक्षण पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में हुए 10 अंतरराज्यीय जल समझौतों में से चार राजस्थान से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों को कभी असंभव माना जाता था, उन्हें अब धरातल पर साकार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान की पहचान केवल ‘हरियालो राजस्थान’ के रूप में ही नहीं, बल्कि पानी से समृद्ध प्रदेश के रूप में भी होगी।
गोडावण संरक्षण यानी थार के पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोडावण को बचाना केवल एक पक्षी प्रजाति का संरक्षण नहीं है, बल्कि पूरे थार के पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ना राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे गोडावण को मरुधरा के खुले आसमान में सुरक्षित और स्वच्छंद उड़ान भरते देखने के मिशन में अपना योगदान दें।
थार से गोडावण का भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पूरा थार क्षेत्र गोडावण से भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में गोडावण संरक्षण के क्षेत्र में हुई प्रगति वैश्विक स्तर पर उदाहरण बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि गोडावण संरक्षण कार्यक्रम की सफलता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच के साथ केंद्र एवं राज्य सरकारों, वैज्ञानिकों, वन विभाग और स्थानीय समुदायों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
गोडावण को बताया थार की ‘अम्ब्रेला स्पीशीज’
भूपेंद्र यादव ने कहा कि गोडावण थार पारिस्थितिकी तंत्र की ‘अम्ब्रेला स्पीशीज’ है। इसके संरक्षण से घासभूमियों के संरक्षण, भूमि क्षरण को रोकने और मध्य एशियाई फ्लाईवे में प्रवासी पक्षियों के महत्वपूर्ण पड़ावों को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि गोडावण संरक्षण के पर्यावरणीय लाभों के साथ स्थानीय समुदायों को इको-टूरिज्म के माध्यम से आर्थिक अवसर भी मिल सकते हैं।
सम और रामदेवरा केंद्रों में 97 गोडावण
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार और भारतीय वन्यजीव संस्थान के संयुक्त प्रयासों से जैसलमेर के सम और रामदेवरा प्रजनन केंद्रों में 97 गोडावण मौजूद हैं।
रामदेवरा में विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के परामर्श से तैयार री-वाइल्डिंग एवियरी कैप्टिव-ब्रेड गोडावण को पर्याप्त उड़ान क्षेत्र उपलब्ध कराती है। इससे उन्हें प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल होने और स्वाभाविक व्यवहार विकसित करने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का आभार जताते हुए कहा कि गोडावण संरक्षण का यह प्रयास केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
कार्यक्रम के दौरान जोधपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा तथा वन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
























































