लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नागौर (प्रदीप कुमार डागा) : कृषि विज्ञान केंद्र आठियासन द्वारा जायल पंचायत समिति के ग्राम खियाला में महिलाओं के लिए “संतुलित उर्वरक उपयोग” विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों को आधुनिक, टिकाऊ और कम लागत वाली खेती की तकनीकों से जोड़ना था।
प्रशिक्षण के दौरान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गोपीचंद सिंह ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बेहतर उत्पादन के लिए समय-समय पर मिट्टी और पानी की जांच कराकर आवश्यकतानुसार ही उर्वरकों का उपयोग करें। साथ ही जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
पशु वैज्ञानिक बुधाराम चौधरी ने गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि पशुओं को पर्याप्त पानी, हरा चारा और छायादार स्थान उपलब्ध कराना जरूरी है। साथ ही गोबर खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और खेती की लागत भी कम होती है।
कृषि पर्यवेक्षक किरण ने वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत और बीजामृत के उपयोग की विधियां समझाईं, वहीं राकेश गुर्जर ने बीज उपचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इससे फसलों को शुरुआती रोगों और कीटों से सुरक्षा मिलती है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला किसानों ने भाग लिया और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। अंत में महिलाओं ने संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खेती अपनाने का संकल्प लिया।




















































