लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नितिन मेहरा वरिष्ठ संवाददाता, (अजमेर/जोधपुर)
बाल विवाह के खिलाफ सीमा की बड़ी जीत:
जोधपुर। राजस्थान की एक बेटी ने समाज की पुरानी और गलत परंपरा को हराकर अपने सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाया है। जोधपुर की रहने वाली सीमा, जिसकी शादी बचपन में ही कर दी गई थी, अब उस बंधन से पूरी तरह स्वतंत्र हो गई है। स्थानीय पारिवारिक न्यायालय (Family Court) ने उसके बचपन में हुए विवाह को अवैध मानते हुए उसे रद्द करने का बड़ा फैसला सुनाया है।
मुख्य बातें:
अन्याय के खिलाफ आवाज: सीमा का विवाह साल 2015 में केवल 9 साल की छोटी सी उम्र में कर दिया गया था। बड़े होने पर उसने इस रिश्ते को स्वीकार करने के बजाय न्याय की राह चुनी।
कठिन कानूनी सफर: सीमा को इस आजादी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। सवा साल पहले उसने सारथी ट्रस्ट के सहयोग से कानूनी कार्यवाही शुरू की थी। दिलचस्प बात यह है कि सुनवाई के दौरान लड़के पक्ष ने शादी होने की बात से ही पल्ला झाड़ लिया था।
ठोस सबूतों ने दिलाई जीत: सारथी ट्रस्ट की डॉ. कृति भारती ने अदालत में पुख्ता दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए, जिससे शादी की सच्चाई साबित हुई। न्यायाधीश वरुण तलवार ने इन सबूतों के आधार पर विवाह को शून्य (null and void) घोषित कर दिया।
सीमा का संकल्प:अदालत के फैसले के बाद सीमा ने राहत की सांस ली है। अब उसका पूरा ध्यान अपनी शिक्षा और करियर पर है। वह समाज की अन्य लड़कियों के लिए भी एक मिसाल बनकर उभरी है।





















































