झाड़ू चलाने से नहीं, पूरी व्यवस्था सुधारने से बदलेगी शहर की तस्वीर

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

नागौर की सफाई व्यवस्था पर बड़ा सवाल:

नागौर। (प्रदीप कुमार डागा) शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से नगर परिषद सभापति, एसडीएम गोविंद सिंह भींचर सहित अधिकारियों ने सड़क पर झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की यह पहल निश्चित रूप से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का सकारात्मक प्रयास है। हालांकि, इन तस्वीरों के बीच शहर की स्थायी सफाई व्यवस्था को लेकर कई बुनियादी सवाल भी सामने आ रहे हैं।

सवाल यह है कि कुछ देर सड़क पर झाड़ू लगाने से क्या शहर की रोजमर्रा की सफाई व्यवस्था में स्थायी बदलाव आएगा? नागौर को प्रतीकात्मक सफाई अभियानों से आगे बढ़कर ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें हर वार्ड में नियमित सफाई, कचरे का समय पर उठाव और संसाधनों की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो।

करीब 260 सफाई कर्मचारी, फिर भी व्यवस्था पर सवाल

नगर परिषद में करीब 260 सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था बताई जाती है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यह है कि इनमें से कितने कर्मचारी प्रतिदिन वास्तविक रूप से वार्डों और अन्य सफाई कार्यों में तैनात रहते हैं।

यदि प्रत्येक कर्मचारी की वार्डवार जिम्मेदारी तय हो, उपस्थिति की नियमित निगरानी की जाए और सफाई कार्य की दैनिक रिपोर्ट तैयार हो तो उपलब्ध मानव संसाधन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही अधिकारियों की ओर से नियमित निरीक्षण भी जरूरी है, ताकि कागजों में दर्ज व्यवस्था और धरातल पर हो रहे काम के बीच अंतर की स्थिति सामने आ सके।

ऑटो टीपर की संख्या और उपयोग पर भी निगरानी जरूरी

घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था में ऑटो टीपर की भूमिका महत्वपूर्ण है। जानकारी के अनुसार करीब 25 से 30 ऑटो टीपर कचरा संग्रहण कंपनी को उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं नगर परिषद के शेष वाहनों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

यदि नगर परिषद के सभी उपलब्ध ऑटो टीपर चालू हालत में लाकर निर्धारित वार्डों में नियमित रूप से लगाए जाएं तो डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके लिए वाहनों की फिटनेस, तैनाती, प्रतिदिन की आवाजाही और कचरा उठाने की स्थिति की निगरानी आवश्यक है।

लाखों के भुगतान के बाद सेवा की गुणवत्ता पर सवाल

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए नगर परिषद की ओर से लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि भुगतान के अनुरूप सेवा धरातल पर कितनी प्रभावी है।

शहर के विभिन्न इलाकों से कचरा संग्रहण वाहन नियमित रूप से नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल विशेष स्वच्छता अभियानों के दौरान सफाई पर जोर देने के बजाय रोजाना की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।

परिषद को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक वार्ड में निर्धारित वाहन और कर्मचारी मौजूद रहें। साथ ही वाहनों की लोकेशन, कर्मचारियों की उपस्थिति और प्रतिदिन उठाए गए कचरे का रिकॉर्ड भी नियमित रूप से जांचा जाए।

नई सभापति के साथ अधिकारियों की भी जवाबदेही

नवनिर्वाचित सभापति के लिए कार्यकाल की शुरुआत में परिषद की पुरानी व्यवस्थाओं, ठेकों, संसाधनों और कार्यप्रणाली को समझने में कुछ समय लगना स्वाभाविक है। लेकिन परिषद की प्रशासनिक व्यवस्था लंबे समय से संभाल रहे अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

सफाई कर्मचारियों की तैनाती, ऑटो टीपर की स्थिति और कचरा संग्रहण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्रशासनिक तंत्र के पास होनी चाहिए। ऐसे में सवाल यह है कि इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अब तक किस स्तर पर मॉनिटरिंग की गई और क्या कमियां सामने आने पर उन्हें दूर किया गया?

परिषद के सामने कई सीधे सवाल

  • करीब 260 सफाई कर्मचारियों में से कितने प्रतिदिन वास्तविक सफाई कार्य में लगे हैं?
  • वार्डवार कर्मचारियों की तैनाती और उपस्थिति का रिकॉर्ड क्या है?
  • नगर परिषद के पास कुल कितने ऑटो टीपर हैं और इनमें से कितने चालू हालत में हैं?
  • कितने वाहन डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण कंपनी को उपलब्ध कराए गए हैं?
  • खराब वाहनों की मरम्मत कर उन्हें दोबारा काम में क्यों नहीं लिया जा रहा?
  • कचरा संग्रहण के लिए ठेकेदार को किए जा रहे भुगतान के मुकाबले कितने वाहन और कर्मचारी प्रतिदिन काम कर रहे हैं?
  • प्रत्येक वार्ड में कचरा संग्रहण की नियमित मॉनिटरिंग किस स्तर पर हो रही है?
  • क्या कचरा संग्रहण और सफाई कार्य की दैनिक रिपोर्टिंग की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू है?

फोटो से आगे व्यवस्था में बदलाव की जरूरत

सड़क पर झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश देना अच्छी पहल है, लेकिन इसका असर तभी दिखाई देगा जब यह अभियान नियमित व्यवस्था में तब्दील हो। नागौर की तस्वीर केवल एक दिन के स्वच्छता अभियान से नहीं, बल्कि हर दिन होने वाली सफाई से बदलेगी।

नगर परिषद के पास उपलब्ध कर्मचारी, वाहन, बजट और अन्य संसाधनों का पूरा उपयोग सुनिश्चित करना होगा। वार्डवार जिम्मेदारी तय करने के साथ जवाबदेही भी तय करनी होगी।

अब जरूरत केवल झाड़ू हाथ में लेकर फोटो खिंचवाने की नहीं, बल्कि ऐसी सफाई व्यवस्था खड़ी करने की है जिसका असर नागौर की सड़कों और गलियों में हर दिन दिखाई दे।

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