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जयपुर में धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई पर सांसद बेनीवाल का बयान

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 

नागौर/जयपुर (प्रदीप कुमार डागा)। राजस्थान में भजनलाल सरकार द्वारा जयपुर सहित विभिन्न स्थानों पर मंदिर, मस्जिद एवं अन्य धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई को लेकर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

अपने प्रेस वक्तव्य में उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई ने एक बार फिर वसुंधरा राजे सरकार के उस दौर की याद दिला दी है, जब विकास कार्यों के नाम पर धार्मिक आस्थाओं से जुड़े कई स्थलों को बिना पर्याप्त संवाद और जनता की सहमति के हटाया गया था। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल किसी एक मंदिर या मस्जिद का नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

हनुमान बेनीवाल ने आरोप लगाया कि जयपुर में मस्जिद को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई के विरोध में कुछ मुस्लिम विधायकों ने आवाज उठाई है, लेकिन कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता इस मुद्दे पर मौन हैं, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या सत्ता और विपक्ष के कुछ नेताओं के बीच धार्मिक मामलों पर मौन सहमति बन चुकी है, जिसका जवाब जनता चाहती है।

उन्होंने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास का अर्थ यह नहीं हो सकता कि लोगों की भावनाओं और धार्मिक विश्वासों की अनदेखी की जाए। उन्होंने मांग की कि किसी भी निर्माण या हटाने की कार्रवाई से पहले संबंधित समुदायों से संवाद, सहमति और विश्वास निर्माण की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

सांसद ने मुख्यमंत्री से कहा कि लोकतंत्र “बुलडोज़र की ताकत” से नहीं बल्कि जनता के विश्वास से चलता है। उन्होंने इंटरनेट सेवाओं को बार-बार बंद किए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों, डिजिटल भुगतान प्रणाली और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े युवाओं की आजीविका प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान पहले से ही इंटरनेट बंदी के मामलों में देश के अग्रणी राज्यों में रहा है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था और आधुनिक शासन व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

अंत में उन्होंने सरकार से अपील की कि विकास, विरासत, कानून व्यवस्था और जनविश्वास के बीच संतुलन स्थापित किया जाए, क्योंकि बिना संवाद के किया गया विकास विवाद का कारण बनता है, जबकि सहमति आधारित विकास स्थायी और स्वीकार्य होता है।

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