घुमंतू जनजातियों के प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी से की मुलाकात; 10% पृथक आरक्षण की उठाई मांग

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क​

नई दिल्ली । नई दिल्ली में देश के 22 राज्यों से आए घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त जातियों (DNT) के एक उच्चस्तरीय 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने संसद में नेता प्रतिपक्ष  राहुल गांधी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने घुमंतू समाज की ज्वलंत समस्याओं, उनके ऐतिहासिक संघर्ष और संवैधानिक अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व और मुख्य सहभागी:

इस प्रतिनिधिमंडल में एआईसीसी अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, एस.पी. लबाना (डीएनटी टास्क फोर्स), बालकृष्ण रेनके, पूर्व मंत्री व लोक सुराज के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल केसावत, और दिगंबर राठौड़ सहित देश के विभिन्न प्रांतों के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल रहे।

प्रमुख मांगें और राहुल गांधी का आश्वासन

​प्रतिनिधिमंडल ने नवगठित ‘डीएनटी फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के बैनर तले भारत सरकार से निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:

घुमंतू (DNT) जातियों के लिए पृथक रूप से 10% आरक्षण की व्यवस्था।

​देश में डीएनटी समुदायों की सटीक जनसंख्या गणना (Census)।

​नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे देश की घुमंतू जनजातियों का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे और अध्ययन करवाने तथा उनकी मांगों को संसद के पटल पर पुरजोर तरीके से उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

नेहरू-गांधी परिवार के साथ ऐतिहासिक संबंधों का स्मरण

​मुलाकात के दौरान प्रतिनिधियों ने नेहरू-गांधी परिवार के साथ घुमंतू समाज के भावनात्मक और ऐतिहासिक रिश्तों को याद किया।

​मुक्ति का इतिहास: वक्ताओं ने उल्लेख किया कि ब्रिटिश काल के ‘क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 1871’ के कलंक से इस समाज को 31 अगस्त 1952 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ही मुक्त कराया था। इसीलिए इस दिन को यह समुदाय ‘स्वाभिमान मुक्ति दिवस’ के रूप में मनाता है।

​सांस्कृतिक जुड़ाव: इंदिरा गांधी द्वारा तीन मूर्ति भवन में लोक कलाकारों को प्रोत्साहन देने और 1985 में राजीव गांधी एवं सोनिया गांधी द्वारा राजस्थान के मेवाड़ में आदिवासियों के साथ बिताए गए समय को आज भी याद किया गया।

​भारत जोड़ो यात्रा का प्रभाव: राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान इन समुदायों से हुए आत्मीय संवाद ने इस पुराने रिश्ते को नई ऊर्जा प्रदान की है।

घुमंतू समाज की वर्तमान स्थिति

​शाहपुरा उपखंड सहित देश भर में फैले इन समुदायों का इतिहास गौरवशाली रहा है, किंतु दुर्भाग्यवश आजादी के 75 साल बाद भी स्थायी निवास, शिक्षा और जागरूकता के अभाव में ये मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने जोर दिया कि नेहरू जी की नीतियों—जिसमें उन्होंने कहा था कि इन जातियों का विकास उनकी विशिष्ट जीवन शैली और परंपराओं को सुरक्षित रखकर होना चाहिए—को धरातल पर उतारने की आज सख्त आवश्यकता है।

​डीएनटी फेडरेशन ऑफ इंडिया के गठन और राहुल गांधी से इस सार्थक मुलाकात के बाद घुमंतू समाज को आशा है कि उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए आने वाले दिनों में सकारात्मक परिणाम निकलेंगे।

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