भजनलाल जी… आप पर लानत है! गहलोत का बड़ा हमला

0
4
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

—‘पालिका चुनाव जीतने के लिए सारे हथकंडे अपनाए

निकाय चुनाव के बाद पंचायत चुनाव से पहले फिर गरमाई राजस्थान की सियासत, बाड़ेबंदी और कथित दबाव को लेकर गहलोत ने सरकार को घेरा

जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने और चेयरमैन-उप चेयरमैन के चुनाव के बाद भी सियासी घमासान थमता नजर नहीं आ रहा है। अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तीखा हमला बोला है।

गहलोत ने निकाय चुनाव के दौरान पार्षदों की कथित बाड़ेबंदी, उनके परिवारों पर दबाव और सत्ता के कथित दुरुपयोग को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए जिस तरह के हथकंडे अपनाए गए, वे राजस्थान की राजनीतिक परंपरा नहीं हैं।

गहलोत ने यहां तक कहा कि वे पहले भजनलाल शर्मा को ‘भला आदमी’ समझते थे, लेकिन पालिका चुनाव जीतने के लिए अपनाए गए कथित तरीकों से उन्हें निराशा हुई है।

‘भजनलाल जी… आप पर लानत है’

गहलोत ने कहा—

“भजनलाल जी, आप पर लानत है। आपने चुनाव जीतने के लिए जो हथकंडे अपनाए, वो राजस्थान की परंपरा नहीं है। मैं तो आपको भला आदमी समझता था, लेकिन आपने तो पालिका चुनाव जीतने के लिए सारे हथकंडे अपना लिए।”

गहलोत का आरोप है कि निकाय चुनाव के बाद बोर्ड बनाने और चेयरमैन की कुर्सी हासिल करने के लिए पार्षदों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि कुछ पार्षदों और उनके परिवारों पर दबाव बनाया गया तथा पुराने मामलों को लेकर भी दबाव की स्थिति पैदा की गई।

बीजेपी पर निशाना, ‘सरकारी तंत्र के इस्तेमाल’ का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव में पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि सत्ता का इस्तेमाल राजनीतिक समीकरण अपने पक्ष में करने के लिए नहीं होना चाहिए।

गहलोत ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजस्थान की राजनीतिक परंपरा से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।

हालांकि, ये सभी आरोप गहलोत और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। बीजेपी इन आरोपों को खारिज करती रही है।

बीजेपी का पलटवार—‘कांग्रेस हार की खीज निकाल रही’

गहलोत के आरोपों पर बीजेपी नेताओं का कहना है कि सरकार ने किसी भी पार्षद के खिलाफ नियम विरुद्ध कार्रवाई नहीं की। बीजेपी नेताओं ने गहलोत के बयान को राजनीतिक प्रतिक्रिया बताते हुए कहा कि कांग्रेस चुनावी नतीजों के बाद हार की खीज निकाल रही है।

बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि पार्षदों को अपनी राजनीतिक पसंद के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता है और चुनाव के दौरान पार्टी स्तर पर अपने प्रतिनिधियों को एकजुट रखना सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है।

यानी राजस्थान की सियासत में तस्वीर साफ है—एक तरफ सत्ता के दुरुपयोग और दबाव के आरोप, दूसरी तरफ आरोपों को खारिज करने का बीजेपी का दावा।

निकाय चुनाव ने बढ़ाई राजनीतिक तल्खी

नगर निकाय चुनाव में बीजेपी ने कई महत्वपूर्ण शहरी निकायों में बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की। मेयर चुनावों में भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला रहा। अजमेर, उदयपुर, अलवर, पाली, भरतपुर और भीलवाड़ा में बीजेपी के मेयर चुने गए, जबकि बीकानेर में कांग्रेस का मेयर बना। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के मेयर चुनाव 25 सितंबर को होने हैं।

चेयरमैन और उप चेयरमैन के चुनावों के दौरान कई निकायों में बहुमत के आंकड़े के आसपास मुकाबला रहा। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं ने राजनीतिक गतिविधियों को और तेज किया।

होटल-रिसॉर्ट की बाड़ेबंदी पर भी उठे सवाल

निकाय चुनाव के बाद कई जगह पार्षदों को एकजुट रखने के लिए होटल और रिसॉर्ट में ठहराए जाने की तस्वीरें सामने आईं। राजनीतिक दलों की ओर से इसे अपने पार्षदों को टूटने से बचाने की रणनीति बताया गया, जबकि विपक्ष ने इसे दबाव और राजनीतिक जोड़-तोड़ से जोड़कर सवाल उठाए।

यहीं से बहस इस सवाल तक पहुंची कि आखिर जनता के वोट से चुना गया पार्षद चेयरमैन या मेयर चुनते समय कितना स्वतंत्र है?

हालांकि, होटल या रिसॉर्ट में पार्षदों के ठहरने मात्र से किसी तरह के अवैध दबाव की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए अलग से ठोस प्रमाण जरूरी हैं।

अब पंचायत चुनाव की बारी

नगर निकाय चुनाव के बाद अब राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। पंचायत चुनाव के लिए लॉटरी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे में निकाय चुनाव के दौरान सामने आए राजनीतिक विवादों के बीच अब नजर गांव की सरकार के चुनाव पर टिक गई है।

कांग्रेस की ओर से आशंका जताई जा रही है कि निकाय चुनाव जैसा राजनीतिक दबाव पंचायत चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। वहीं बीजेपी का कहना है कि सरकार लोकतांत्रिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत काम कर रही है।

राजस्थान से दिल्ली तक गहलोत का हमला

गहलोत ने अपने हमले को सिर्फ निकाय चुनाव तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया, निर्वाचन व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं और विपक्ष की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।

गहलोत ने दावा किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव की स्थिति लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से राजस्थान बंद जैसे कदम उठाने की अपील की।

इन बयानों के जरिए गहलोत ने राजस्थान के निकाय चुनाव से जुड़े विवाद को व्यापक राष्ट्रीय राजनीतिक बहस से जोड़ दिया है।

अब असली सवाल—सत्ता का खेल या लोकतांत्रिक रणनीति?

राजस्थान में निकाय चुनाव का मतदान और नतीजे भले ही आ चुके हों, लेकिन उसके बाद की सियासत अभी जारी है।

एक तरफ गहलोत का आरोप है कि सत्ता की ताकत और सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर पार्षदों को प्रभावित करने की कोशिश हुई।

दूसरी तरफ बीजेपी का साफ कहना है कि कोई नियम विरुद्ध काम नहीं हुआ और कांग्रेस अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर बयानबाजी कर रही है।

अब निकाय चुनाव का अध्याय खत्म होने के बाद पंचायत चुनाव का मैदान तैयार है।

सवाल यही है कि आने वाले चुनाव में मुकाबला सिर्फ वोट और विचारों का होगा या फिर राजनीतिक समीकरण, समर्थन और सत्ता की ताकत भी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनेगी?

निकाय चुनाव की कुर्सियां तय हो गईं… लेकिन बाड़ेबंदी और कथित दबाव को लेकर छिड़ी सियासी जंग अभी खत्म नहीं हुई है।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here