
जयपुर। जयपुर ट्रांसपोर्ट यूनियन ने राजस्थान सरकार के 27 जुलाई को जारी एक नोटिफिकेशन का विरोध किया है। यूनियन के अध्यक्ष सतीश जैन, महामंत्री अमन कामदार और प्रवक्ता राजीव त्रेहान ने एक साझा बयान जारी कर इसे काला कानून करार दिया है। त्रेहन ने कहा कि सरकार ने जो फैसला लिया है वह जनता ट्रांसपोर्ट के लिए काला कानून के समान है । इसमें भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं है। प्राइवेट बसों को मात्र ₹40000 सालाना लेकर माल ढोने की खुली छूट देने से सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान होगा। वहीं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेशों की अवहेलना होगी। जिसमें पैसेंजर गाड़ियों में किसी भी तरह की वस्तुओं का परिवहन करने पर रोक लगाई गई थी। लेकिन माना जा रहा है कि परिवहन मंत्री ने कुछ नजदीकी लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह का निर्णय किया है । जिसका राजस्थान ट्रांसपोर्ट यूनियन भी विरोध करती है। सतीश जैन ने कहा कि एक तरफ तो सरकार ट्रांसपोर्ट, ट्रकों की पाबंदी लगा रखी है और दूसरी तरफ बसों को खुलेआम छूट दे दी है। शहर में माल भरिए और उतारिए उस शहर में अव्यवस्था से फैलाहिए ,छोटे ट्रांसपोर्ट कंपनियां बंद हो जाएगी। ट्रांसपोर्ट अपना बंद करके भाग जाएंगे।
आरटीओ का घेराव
यूनियन के महामंत्री अमन कामदार ने कहा कि अगर यह कानून लागू होता है तो हम ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर रोड पर आ जाएंगे, हड़ताल करेंगे, जरूरत पड़ी तो आरटीओ का घेराव करेंगे और सरकार से आर-पार की लड़ाई करेंगे । राम अवतार मोर ने कहा कि अगर सरकार इस कानून को बंद नहीं किया तो विरोध करेंगे I VKI के अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने भी इसका विरोध किया है। सभी ने सरकार से इस नोटिफिकेशन को वापस लेने, ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को बचाने की मांग की है । जरूरत पड़ने पर सभी ट्रांसपोर्ट व्यवसाई मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलकर उन्हें इस कानून के बारे में अवगत कराएंगे और उसे वापस ले लें के लिए बात करेंगे।







































