लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
रिपोर्ट: विजय कपूर
कुंतासर गाँव ने मानवता की एक अनोखी मिसाल देखते हुए भावपूर्ण क्षण का अनुभव किया, जब गाँव की प्रतिष्ठित महिला तीजादेवी सहू, धर्मपत्नी स्व. सावंताराम सहू, ने मरणोपरांत नेत्रदान कर समाज में दान और सेवा की प्रेरणादायी परंपरा को आगे बढ़ाया। यह घटना गाँव के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय अध्याय बन गई है।
परिवार ने दिया नेत्रदान का संकल्प
नेत्रदान की स्वीकृति उनके पुत्र पुरखाराम सहू एवं उनकी धर्मपत्नी किशनीदेवी, साथ ही पौत्र जगदीश, मुखराम, अमरचंद, जयकरण सहू द्वारा दी गई।
परिवारजन ने श्रद्धा और भावुकता के साथ इस महान कार्य में अपनी भागीदारी निभाई।
तीजादेवी सहू के पड़पौत्र — दीपांशु, तेजस्व, नितिन, गगन, ध्रुव, मानव — की उपस्थिति ने इस क्षण को और भी भावनात्मक और प्रेरणादायी बना दिया।
गाँव के गणमान्य लोग बने साक्षी
गाँव के कई वरिष्ठजन व परिजन —
मालाराम, आशाराम, मेघाराम, मोहनराम, सुगनाराम, किशनाराम, आदुराम, मुनीराम, रावताराम सहित अनेक गणमान्य लोग — इस पुण्य कार्य के साक्षी बने और परिवार के इस निर्णय की सराहना की।
प्रशिक्षित टीम ने किया नेत्र संग्रहण
नेत्रदान संग्रहण का कार्य प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर की प्रशिक्षित टीम द्वारा संवेदनशीलता और दक्षता के साथ पूर्ण किया गया। इसमें
-
डॉ. अंकित स्वामी
-
मुखराम सहू
के साथ -
तेरापंथ युवक परिषद् श्रीडूंगरगढ़ के संयोजक अशोक झाबक,
-
अध्यक्ष विक्रम मालू,
-
उपाध्यक्ष चमन श्रीमाल
की तत्काल सक्रियता और समर्पण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गाँव ने किया पुण्य कार्य का अभिनंदन
गाँववासियों ने तीजादेवी सहू की मानवता पूर्ण अंतिम भेंट को समाज के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। लोगों ने कहा—
“तीजादेवी सहू का नेत्रदान दो ज़िंदगियों में नई रोशनी बनकर उजाला करेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत रहेगा।”
कुंतासर गाँव में दिया गया यह उदाहरण साबित करता है कि मृत्यु के बाद भी आंखों की यह अनमोल भेंट दो जीवनों में नई उम्मीद जगा सकती है और समाज में सेवा तथा संवेदना की रोशनी फैला सकती है।








































