बम्बूली में चार माह से सफाई व्यवस्था ठप्प

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जलभराव और गंदगी से बढ़ा बीमारियों का खतरा, ग्रामीणों में नाराजगी

मनोज कुमार योगी

नैनवां/बूंदी। बम्बूली ग्राम पंचायत में पिछले चार से पांच माह से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। गांव की अधिकांश नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं, जिसके चलते गंदा पानी गलियों, सड़कों और मुख्य मार्गों पर जमा हो गया है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को रोजाना गंदे पानी के बीच होकर गुजरना पड़ रहा है। गांव में फैली बदबू और जलभराव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत प्रशासन की लापरवाही के कारण गांव में नियमित सफाई व्यवस्था पूरी तरह बंद पड़ी है। लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं होने से पानी की निकासी बाधित हो गई है और कई स्थानों पर नालियों का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे होने से वातावरण दूषित हो रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले ही गांव के हालात इतने खराब हैं तो बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो सकती है।

पंचायत सचिव ने नहीं उठाया फोन

मामले में जानकारी लेने के लिए ग्राम पंचायत सचिव रामप्रकाश धाकड़ से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे ग्रामीणों में पंचायत प्रशासन के प्रति नाराजगी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही जवाब देने को तैयार नहीं हैं तो गांव की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।

सफाई फर्म और ग्रामीणों के दावों में विरोधाभास

सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही फर्म “सुनीता रियलिटी एंड लाइफस्टाइल” के प्रोपराइटर राखीलाड़ी मीणा ने दावा किया कि गांव में नियमित सफाई कार्य कराया गया है। उनके अनुसार फर्म द्वारा नियमित झाड़ू लगवाई जाती रही तथा प्रत्येक सप्ताह नालियों और अन्य स्थानों की सफाई करवाई गई।

उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत में जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक टेंडर अवधि रही थी, जिसके बाद टेंडर समाप्त हो गए। मीणा के अनुसार नौ माह की अवधि में करीब एक लाख रुपए का ही भुगतान हुआ है और अधिकांश बिल अभी भी बकाया हैं। भुगतान नहीं मिलने के कारण सफाई कार्य प्रभावित हुआ है।

हालांकि ग्रामीणों ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। ग्रामीण बृजराज विजय, रामलडृडू नागर, प्रमोद कुमार नागर, शंकर नागर और राकेश नागर ने कहा कि गांव में पिछले चार-पांच महीनों से सफाई नहीं हुई है। उनका आरोप है कि पूरे वर्ष भी नियमित सफाई नहीं हुई और स्वच्छ भारत मिशन के तहत चलने वाली कचरा संग्रहण गाड़ी भी गांव में नहीं आ रही है।

ग्रामीणों के अनुसार पहले कचरे की गाड़ी 15 से 20 दिन में एक बार आती थी, लेकिन जनवरी 2026 से वह भी पूरी तरह बंद है।

स्वच्छता बजट पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायत स्तर पर हर माह करीब 1 लाख 40 हजार रुपए तक खर्च कर रही है, तब भी गांव की सफाई व्यवस्था इतनी बदहाल क्यों है। लोगों ने स्वच्छता मद की राशि के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बीमारियों का बढ़ा खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गांव में जमा गंदा पानी और कचरा मच्छरों, बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। इससे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, टाइफाइड, डायरिया, कॉलरा, त्वचा रोग और आंखों के संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि सबसे अधिक खतरा स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को है, जिन्हें रोजाना गंदगी और जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने की जांच की मांग

गांववासियों ने प्रशासन से सफाई व्यवस्था की तत्काल जांच कराने, नालियों की सफाई करवाने, जलभराव की समस्या दूर करने तथा स्वच्छता मद में हुए खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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