लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नितिन मेहरा | वरिष्ठ संवाददाता, राजस्थान
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक परिस्थितियों और अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चर्चाओं के बीच सीमावर्ती इलाकों में हलचल तेज हो गई है। उत्तर 24 परगना के हकीमपुर बॉर्डर समेत कई सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के बांग्लादेश लौटने की खबरें सामने आ रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों के बीच कार्रवाई और पहचान प्रक्रिया को लेकर भय का माहौल बना हुआ है। बकरीद से पहले अचानक बढ़ी आवाजाही ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
दस्तावेजों की कमी बनी बड़ी वजह
जानकारी के मुताबिक, वापस लौट रहे कई लोगों के पास पुराने वैध भारतीय दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण संभावित जांच और कानूनी कार्रवाई के डर से वे सीमा पार जाने की कोशिश कर रहे हैं।
राज्य में अवैध प्रवासियों के खिलाफ चल रही सख्ती और “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट” अभियान की चर्चाओं ने सीमावर्ती इलाकों में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
वर्षों से मजदूरी कर रहे थे कई परिवार
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इनमें से कई लोग लंबे समय से कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अन्य शहरों में दिहाड़ी मजदूर, राजमिस्त्री और घरेलू सहायक के रूप में काम कर रहे थे। रोजगार की तलाश में सीमा पार कर आए ये परिवार वर्षों से यहां रह रहे थे, लेकिन अब कार्रवाई की आशंका के चलते वापस लौट रहे हैं।
खुलना और जशोर की ओर बढ़ी आवाजाही
सीमा पार लौटने वाले अधिकांश लोगों का संबंध बांग्लादेश के खुलना, जशोर और आसपास के जिलों से बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के बीच कथित तौर पर दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, सीमा पार कराने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
बीएसएफ और पुलिस अलर्ट मोड पर
सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय पुलिस ने अचानक बढ़ी गतिविधियों को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और गश्त बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियां दस्तावेजों की जांच और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में बनी नई सरकार के बाद सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी काफी चर्चा में है।







































