लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
चौमहला, झालावाड़। इस वर्ष होली पर्व पर चंद्रग्रहण के योग के चलते होलिका दहन एवं धुलेंडी अलग-अलग तिथियों में मनाए जाएंगे। ज्योतिषाचार्य बाबूलाल व्यास (श्री अम्बे माता मंदिर, चौमहला) ने बताया कि होलिका दहन 2 मार्च, सोमवार को तथा धुलेंडी 3 मार्च, मंगलवार को रंग खेला जाएगा।
उन्होंने बताया कि 2 मार्च को शाम 6:28 बजे से रात 8:52 बजे के मध्य (प्रदोष काल) में होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा। 2 मार्च को शाम 5:56 बजे पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो 3 मार्च को शाम 6:50 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन शुक्ल प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में भद्रा रहित काल में होलिका दहन करना शुभ माना गया है। इस बार फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी तिथि 2 मार्च को शाम 5:55 बजे तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि लग जाएगी, इसलिए प्रदोष काल में पूर्णिमा 2 मार्च को होने से इसी दिन होलिका दहन करना उचित रहेगा।
उन्होंने बताया कि 2 मार्च को भद्रा (स्वर्गलोक) शाम 5:56 बजे से 3 मार्च मंगलवार सुबह 5:32 बजे तक रहेगी।
धुलेंडी पर नहीं पड़ेगा ग्रहण का प्रभाव
इस वर्ष 3 मार्च को उदय होता हुआ चंद्रग्रहण दिखाई देगा, जो लगभग 16 मिनट का रहेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस ग्रहण का धुलेंडी पर्व पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। ग्रहण का सूतक काल प्रातः 9:43 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र तथा सिंह राशि के चंद्र पर ग्रस्तोदित रूप में दिखाई देगा। ग्रहणकाल शाम 6:30 बजे मध्यमान से प्रारंभ होगा।
बच्चों, वृद्धों एवं रोगियों को सूतक के नियमों से मुक्त बताया गया है। यदि जन्म नक्षत्र पर या जन्म नक्षत्र से आठवें नक्षत्र पर ग्रहण हो तो उसे अशुभ माना जाता है।
द्वादश राशियों पर ग्रहण का प्रभाव
-
मेष – धन हानि, चिंता
-
वृषभ – कार्य सिद्धि
-
मिथुन – धन लाभ
-
कर्क – अपव्यय, हानि
-
सिंह – तनाव, कष्ट, दुर्घटना की आशंका
-
कन्या – धन हानि
-
तुला – धन लाभ
-
वृश्चिक – चोट, भय
-
धनु – चिंता, कष्ट
(अन्य राशियों के लिए विस्तृत प्रभाव ज्योतिष परामर्श अनुसार ज्ञात किया जा सकता है।)


















































