दुर्घटना में घायल युवक की मौत के बाद अस्पताल ने नहीं दी डेड बॉडी, किरोड़ी लाल मीणा के हस्तक्षेप से मिला शव

0
712
- Advertisement -
लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
सड़क दुर्घटना में घायल युवक की मौत के बाद दुर्लभ जी अस्पताल ने रोक दी डेड बॉडी
दुर्लभजी अस्पताल में शव रोकने पर बवाल — मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पहुंचे
 सरकारी योजना के बावजूद वसूली — किरोड़ी लाल मीणा ने की अस्पताल की खिंचाई
नीरज मेहरा वरिष्ठ पत्रकार
जयपुर। राजधानी जयपुर के संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सड़क दुर्घटना में घायल युवक विक्रम मीणा का इलाज अस्पताल में चल रहा था, लेकिन शनिवार शाम उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मृतक के परिजनों से करीब 7 लाख रुपये का बिल थमा दिया। परिजनों ने लगभग साढ़े तीन से चार लाख रुपये जमा करा दिए थे, लेकिन शेष 1.79 लाख रुपये न दे पाने पर अस्पताल ने डेड बॉडी देने से इनकार कर दिया।
परिजन पहुंचे मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के पास
पैसे की व्यवस्था न होने पर मृतक के परिजन  मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के पास पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी दी।
किरोड़ी लाल मीणा ने तुरंत अस्पताल प्रशासन को फोन कर हस्तक्षेप करने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल की ओर से फोन तक नहीं उठाया गया।
इसके बाद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा स्वयं अस्पताल पहुंचे, जहां उनके पहुंचते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मीडिया के पहुंचने के बाद प्रशासन ने दबाव में आकर डेड बॉडी रिलीज करने का निर्णय लिया।
सरकारी योजना होने के बावजूद वसूले गए पैसे
मामले पर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि —
 “जब अस्पताल सरकार की मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत एंपैनल्ड हैं, तो सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति से इलाज के नाम पर पैसे वसूलना ग़लत और अवैध है।”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का इलाज निशुल्क है, जबकि प्रधानमंत्री योजना के तहत 25 लाख रुपये तक की दवाएं और उपचार फ्री है।
 “यदि अस्पताल सरकार से लाभ ले रहे हैं, तो फिर जनता से पैसा क्यों वसूल रहे हैं? यह सीधा शोषण है,” — किरोड़ी लाल मीणा ने कहा।
⚖️ निजी अस्पतालों पर गंभीर सवाल
मंत्री ने कहा कि राज्य में कई बड़े निजी अस्पताल
फोर्टिस, एस्कॉर्ट्स, महात्मा गांधी, जेएनयू, संतोकबा दुर्लभजी, सोनी अस्पताल आदि —
सरकार से टोकन रेट पर ज़मीन लेकर बने हैं
 “इन अस्पतालों को 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन इसलिए दी गई थी कि वे गरीबों को मुफ्त इलाज दें,
लेकिन अब वही अस्पताल सरकारी योजनाओं की अनदेखी करते हुए लूट मचा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि कई अस्पताल मरीज की मौत के बाद भी बिल का भुगतान न होने पर शव रोक लेते हैं, जो न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि कानूनी अपराध भी है।
पुलिस भी पहुंची, फिर भी नहीं दी बॉडी
घटना एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) होने के कारण दौसा से पुलिसकर्मी भी अस्पताल पहुंचे थे।लेकिन अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा कि भुगतान होने के बाद ही शव दिया जाएगा।
आख़िरकार मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के हस्तक्षेप के बाद ही शव परिजनों को सौंपा गया।
सरकार से करेंगे शिकायत
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि वे इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करेंगे।
“सरकार की योजनाएं गरीबों के लिए हैं,
लेकिन यदि अस्पताल उनका पालन नहीं कर रहे हैं,
तो उन्हें या तो एंपैनलमेंट से बाहर किया जाए,
या सरकारी ज़मीन वापस ली जाए।”
मामले ने उठाए गंभीर सवाल?
यह घटना न केवल अस्पतालों के रवैये पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि
सरकारी योजनाओं के बावजूद गरीब तबके को अस्पतालों में इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here