लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
रेल मंत्री ने कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले— एसआईआर पर चर्चा के दौरान विपक्ष करेगा वॉकआउट; भाजपा ने उठाए छह सवाल
जयपुर। (रूपनारायण सांवरिया)
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर प्रहार कर देश में अराजकता फैलाना चाहती है। वर्षों की मेहनत, संसद में बने कानूनों और देश के 140 करोड़ नागरिकों के योगदान से मजबूत हुई संस्थाओं पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस को इन संस्थाओं पर प्रहार करने में न शर्म है और न झिझक।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस जिस तरह विभिन्न विषयों को उठाकर लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा पर आंच पहुंचा रही है, उसे जनता के सामने उजागर किया जाएगा। भाजपा और एनडीए ने इस मुद्दे को देश के सामने ले जाने का निर्णय किया है, ताकि कांग्रेस की राजनीति का जवाब दिया जा सके। 
सही मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद
रेल मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र का सबसे मूल आधार सही मतदाता सूची है। इसी के आधार पर चुनाव होते हैं और नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। एसआईआर संविधान के तहत निर्धारित प्रक्रिया है, जो पहली बार नहीं हो रही, बल्कि 1947 के बाद से कई बार अपनाई जा चुकी है। ऐसे में कांग्रेस आज इस प्रक्रिया पर सवाल क्यों उठा रही है?
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है। कांग्रेस को बताना चाहिए कि वर्षों से चली आ रही प्रक्रिया पर अब आपत्ति जताने का औचित्य क्या है।
ईवीएम कांग्रेस सरकार लेकर आई, अब सवाल क्यों?
अश्विनी वैष्णव ने ईवीएम को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन कांग्रेस की सरकार लेकर आई थी। लोकतंत्र को मजबूत बनाने में ईवीएम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि ईवीएम से पहले चुनावों में मतपेटियां भरने, बूथ लूटने और फर्जी मतदान जैसी घटनाएं सामने आती थीं। कांग्रेस और उसके सहयोगियों, विशेषकर कम्युनिस्टों के शासनकाल में ऐसी घटनाएं बार-बार होती थीं। ईवीएम आने के बाद इन घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिली। ऐसे में कांग्रेस अब किस आधार पर इस व्यवस्था पर सवाल उठा रही है?
बैलेट पेपर की मांग पर भी घेरा
रेल मंत्री ने कहा कि कांग्रेस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रही है, जबकि इस व्यवस्था को भी आजमाया जा चुका है। कांग्रेस की मांग पर एमएलसी चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए। इसके बावजूद यदि कांग्रेस सीटें नहीं जीत पाई, तो क्या वह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अपनी मांग वापस लेगी?
उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि क्या वह ऐसी व्यवस्था चाहती है, जिसमें गैर-नागरिकों को भी मतदान का अधिकार मिले, मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में बने रहें और एक ही व्यक्ति के नाम कई स्थानों पर दर्ज हों?
वैष्णव ने कहा कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम होना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।
संविधान की मर्यादा पर कांग्रेस से सवाल
रेल मंत्री ने कांग्रेस नेताओं के संविधान के प्रति विश्वास पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान की किताब लेकर घूमने वाले नेताओं को यह भी समझना चाहिए कि संसद का संचालन संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संविधान के तहत गठित संस्थाओं का सम्मान करना और निर्धारित प्रक्रियाओं को मजबूत करना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह वास्तव में संविधान में विश्वास करती है?
वैष्णव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का इतिहास संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला रहा है। उन्होंने 1975 की इमरजेंसी, कैबिनेट में स्वीकृत अध्यादेश को प्रेस क्लब में फाड़ने और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (नेशनल एडवाइजरी काउंसिल) के गठन का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा संवैधानिक व्यवस्था से अलग रास्ते अपनाने की कोशिश की।
संसद में चर्चा से पीछे नहीं हटेगी सरकार
रेल मंत्री ने कहा कि संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत और संविधान द्वारा स्थापित महत्वपूर्ण संस्था है। सरकार समाज, देश और राजनीति से जुड़े सभी विषयों पर चर्चा के लिए संसद का मंच उपलब्ध कराने को तैयार है।
उन्होंने कांग्रेस से कहा कि यदि उसे एसआईआर पर चर्चा करनी है, तो वह संसद में अपनी मांग रखे। सरकार विशेष सत्र बुलाने से भी पीछे नहीं हटेगी।
वैष्णव ने दावा किया कि कांग्रेस पहले भी विभिन्न विषयों पर चर्चा की मांग करती रही है, लेकिन चर्चा के दौरान उसके नेता सदन छोड़कर चले जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर पर चर्चा के दौरान भी कांग्रेस वॉकआउट करेगी, क्योंकि उसके पास न सच है और न ही कोई ठोस मुद्दा।
वोट बैंक नहीं, विकास की राजनीति का समय
अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब देश की जनता विकास की राजनीति चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत समृद्ध, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय सभी राजनीतिक दलों को संवैधानिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए और देश के विकास में योगदान देना चाहिए।
रेल मंत्री ने कांग्रेस से पूछे छह सवाल
- एसआईआर पर सवाल क्यों? कांग्रेस शासनकाल में भी यह प्रक्रिया होती रही है, फिर अब विरोध का औचित्य क्या है?
- ईवीएम पर आपत्ति क्यों? ईवीएम कांग्रेस सरकार लेकर आई थी, अब उसी व्यवस्था पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?
- बैलेट पेपर की मांग पर क्या परिणाम स्वीकार करेगी? बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर कांग्रेस हार की जिम्मेदारी लेगी?
- क्या अपात्र नाम मतदाता सूची में बने रहने चाहिए? क्या कांग्रेस गैर-नागरिकों, मृत व्यक्तियों और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को हटाने का विरोध करती है?
- क्या कांग्रेस वास्तव में संविधान में विश्वास करती है? क्या वह संवैधानिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का सम्मान करती है?
- क्या कांग्रेस संसद में सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है? क्या वह चर्चा के दौरान सदन छोड़ने के बजाय अपनी बात रखेगी?
प्रेसवार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी, मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा और मीडिया प्रभारी प्रमोद वशिष्ठ उपस्थित रहे।




















































