लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नगर निकाय चुनाव पर गहलोत का हमला: ‘
बोले- निर्दलीयों को डराने-धमकाने और पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप के आरोप गंभीर, लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नगर निकाय चुनाव के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। गहलोत ने भरतपुर नगर निगम के चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए सरकार पर सत्ता और प्रशासन के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर में 65 वार्डों में भाजपा केवल 20 सीटें जीत पाई, जबकि 36 निर्दलीय और 7 कांग्रेस प्रत्याशी विजयी हुए।
गहलोत ने सवाल उठाया कि जब भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था तो भरतपुर में बोर्ड कैसे बना। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित बोर्ड बनने की संभावना के बीच निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाया गया और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश हुई।
गहलोत के मुताबिक, “आप कह रहे हैं कि पुलिस का कोई हस्तक्षेप नहीं था, लेकिन अगर पुलिस-प्रशासन का हस्तक्षेप नहीं था तो निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव से पीछे हटने की स्थिति क्यों बनी?” उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के कहने पर उनके लोगों और मंत्रियों ने निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाया।
‘सत्ता का इस तरह इस्तेमाल लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष रहनी चाहिए। उनका आरोप है कि यदि चुनाव जीतने के लिए प्रशासनिक दबाव का इस्तेमाल होने लगे तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति होगी।
गहलोत ने कहा कि यदि ऐसी घटनाओं की निंदा नहीं की गई और पुलिस-प्रशासन के कथित हस्तक्षेप को नहीं रोका गया तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराए जाने की आशंका बढ़ेगी। उन्होंने जनता और युवाओं से लोकतांत्रिक तरीके से ऐसे मामलों का विरोध करने की अपील भी की।
परिसीमन को लेकर भी सरकार पर निशाना
गहलोत ने नगर निकाय चुनावों से पहले हुए वार्ड परिसीमन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर वार्डों की संरचना बदली गई और कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्रों को अलग-अलग तरीके से पुनर्गठित किया गया।
इससे पहले भी गहलोत परिसीमन को लेकर सवाल उठा चुके हैं। हालिया चुनावों के बाद इंडियन एक्सप्रेस के विश्लेषण में जयपुर, जोधपुर और कोटा के वार्ड परिसीमन में बदलावों को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, हालांकि इन बदलावों के राजनीतिक प्रभाव को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं।
भरतपुर में निर्दलीयों ने बदला पूरा चुनावी गणित
भरतपुर नगर निगम के नतीजे इस बार खास तौर पर चर्चा में रहे। 65 वार्डों में 36 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते, जबकि भाजपा को 20 और कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं। बसपा और आरएलपी को एक-एक सीट मिली। बहुमत का आंकड़ा 33 था, इसलिए निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक स्थिति में थे।
चुनाव परिणाम के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने निर्दलीय पार्षदों से संपर्क किया। रिपोर्टों के अनुसार भाजपा ने निर्दलीयों के समर्थन से अपना आंकड़ा बहुमत तक पहुंचाने की कोशिश की।
गहलोत बनाम भजनलाल सरकार की सियासी जंग तेज
नगर निकाय चुनाव के परिणामों के बाद राजस्थान में गहलोत और भजनलाल सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। गहलोत जहां चुनाव प्रक्रिया, परिसीमन और कथित प्रशासनिक हस्तक्षेप को मुद्दा बना रहे हैं, वहीं भाजपा नेतृत्व चुनाव परिणामों को सरकार के कामकाज और संगठन की स्वीकार्यता से जोड़कर देख रहा है।
स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा को राज्यभर में बड़ी संख्या में बोर्ड और अध्यक्ष पद हासिल हुए हैं, जबकि कई जगह निर्दलीयों और विपक्षी दलों के प्रदर्शन ने पारंपरिक भाजपा-कांग्रेस समीकरण को प्रभावित किया है।
ऐसे में नगर निकाय चुनाव अब केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन परिणामों के बाद राजस्थान की सियासत में ‘सत्ता बनाम विपक्ष’ के साथ-साथ ‘निर्दलीयों की भूमिका, प्रशासन की निष्पक्षता और परिसीमन’ भी बड़े राजनीतिक मुद्दे बनते दिखाई दे रहे हैं।













































