पंचायती राज संस्थाओं में EWS प्रतिनिधित्व की मांग- भाटी

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

EWS पात्रता, प्रमाण-पत्र, आयुसीमा और शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए

बाड़मेर। शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने शुक्रवार को बाड़मेर स्थित आलोक आश्रम में पत्रकार वार्ता एवं सभा को संबोधित करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की आरक्षण व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार और समान अवसर सुनिश्चित करने से जुड़ी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया। भाटी ने कहा कि देश की भौगोलिक, कृषि एवं आर्थिक परिस्थितियों में व्यापक विविधता है और ऐसे में पूरे देश में एक समान संपत्ति संबंधी मानदंड कई राज्यों की जमीनी परिस्थितियों के अनुरूप नहीं बैठते।

भाटी ने कहा कि EWS आरक्षण व्यवस्था संसद द्वारा पारित किए जाने के बाद 12 जनवरी 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ देशभर में लागू हुई थी। राजस्थान में फरवरी 2019 से सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में EWS वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। वर्ष 2022 में EWS प्रमाण-पत्र की वैधता तीन वर्ष किए जाने से अभ्यर्थियों को राहत मिली, लेकिन EWS से जुड़ी कई व्यावहारिक कठिनाइयां अभी भी बनी हुई हैं।

स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हो EWS पात्रता के नियम

विधायक ने कहा कि राजस्थान के अनेक क्षेत्रों में भूमि की उत्पादकता, सिंचाई की उपलब्धता और स्थानीय भूमि मूल्यों की स्थिति अन्य राज्यों से अलग है। ऐसे में केवल भूमि के आकार को आर्थिक क्षमता का आधार मानना वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन नहीं करता। उन्होंने मांग की कि EWS पात्रता निर्धारित करते समय भूमि के आकार के साथ उसकी उत्पादकता, सिंचाई की उपलब्धता, स्थानीय भूमि मूल्य और वास्तविक आर्थिक उपयोगिता जैसे कारकों को भी ध्यान में रखा जाए।

उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग में शामिल विभिन्न जातियों एवं समुदायों के भीतर बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार हैं, जिन्हें शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। वहीं राजस्थान में 30 से अधिक ऐसी जातियां हैं जो राज्य स्तर पर OBC श्रेणी में आती हैं, लेकिन केंद्रीय स्तर पर अनारक्षित वर्ग का हिस्सा हैं। ऐसे परिवारों को केंद्रीय EWS मानदंडों के कारण व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

राज्य के EWS प्रमाण-पत्र को केंद्र में भी मान्यता देने की मांग

भाटी ने मांग की कि राज्यों द्वारा जारी EWS प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय सेवाओं एवं केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के लिए भी मान्यता दी जाए, ताकि अभ्यर्थियों को केंद्र और राज्य के लिए अलग-अलग प्रमाण-पत्र बनवाने की आवश्यकता न हो।

 

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 में राजस्थान सरकार द्वारा 2,77,555 EWS प्रमाण-पत्र जारी किए गए, जबकि केंद्र सरकार द्वारा 95,243 EWS प्रमाण-पत्र जारी हुए। उनके अनुसार यह अंतर EWS प्रमाण-पत्र प्रक्रिया को अधिक सरल एवं व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता को दर्शाता है।

आयुसीमा, शुल्क और प्रमाण-पत्र की वैधता में राहत की मांग

भाटी ने EWS अभ्यर्थियों को अन्य आरक्षित वर्गों की तरह प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकतम आयुसीमा, आवेदन शुल्क तथा जहां लागू हो, न्यूनतम अर्हताओं में उचित छूट देने की मांग रखी। साथ ही EWS प्रमाण-पत्र की वर्तमान एक वर्ष की वैधता को बढ़ाकर तीन अथवा पांच वर्ष किए जाने तथा निर्धारित शर्तों के तहत शपथ-पत्र के आधार पर नवीनीकरण की सुविधा देने का प्रस्ताव रखा।

आय निर्धारण की प्रक्रिया सरल बनाने पर जोर

EWS आय निर्धारण की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग करते हुए भाटी ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार की परिभाषा और विभिन्न दस्तावेजों की आवश्यकता के कारण कई मामलों में प्रक्रिया जटिल हो जाती है। विशेष रूप से विवाहित महिला अभ्यर्थियों को मायके और ससुराल दोनों पक्षों से संबंधित दस्तावेजों के कारण व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने मांग की कि EWS आय निर्धारण को अन्य आरक्षण व्यवस्थाओं में प्रयुक्त आय/क्रीमीलेयर निर्धारण की तर्ज पर सरल किया जाए और माता-पिता की आय को प्रमुख आधार मानते हुए स्पष्ट एवं व्यावहारिक नियम बनाए जाएं।

EWS विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सुविधाओं की मांग

भाटी ने EWS वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, छात्रावास एवं अन्य शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी अवसरों में समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इन सुविधाओं की आवश्यकता है।

इसके साथ ही EWS से संबंधित नीतिगत एवं प्रशासनिक समस्याओं के समेकित समाधान के लिए राष्ट्रीय आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर विचार करने की मांग भी रखी गई।

पंचायती राज संस्थाओं में EWS प्रतिनिधित्व की मांग

विधायक ने पंचायती राज चुनावों में EWS वर्ग के लिए उपयुक्त प्रतिनिधित्व की व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण स्तर पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की स्थानीय स्वशासन में भागीदारी बढ़ाने और उनके मुद्दों को निर्णय प्रक्रिया में स्थान देने की दिशा में व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

75 से अधिक विधायकों का समर्थन

रविन्द्र सिंह भाटी ने बताया कि राजस्थान के 75 से अधिक विधायक इन मांगों के समर्थन में अपनी लिखित सहमति एवं समर्थन पत्र प्रदान कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश के सांसदों से भी व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर उन्हें पूरे विषय और मांगों से अवगत कराया गया है। प्रेस ब्रीफ के अनुसार संबंधित सांसदों ने भी मांगों के प्रति सकारात्मक रुख व्यक्त करते हुए मौखिक रूप से सहमति एवं समर्थन का आश्वासन दिया है।

26 सितंबर से बाड़मेर से शुरू होगी प्रदेशव्यापी यात्रा

EWS व्यवस्था में सुधार की इन मांगों को लेकर रविन्द्र सिंह भाटी 26 सितंबर से बाड़मेर से प्रदेशव्यापी यात्रा की शुरुआत करेंगे। यात्रा बाड़मेर से प्रारंभ होकर बालोतरा, आसोतरा, सिणधरी और गुड़ामालानी होते हुए सांचौर पहुंचेगी।

यात्रा के दौरान EWS व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं, पात्रता एवं प्रमाण-पत्र प्रक्रिया, आयुसीमा, शैक्षणिक सुविधाओं तथा समान अवसर से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों से संवाद किया जाएगा और इन मांगों को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।

आलोक आश्रम में सभा को संबोधित करते हुए भाटी ने कहा कि EWS आरक्षण का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए पात्रता और प्रमाण-पत्र की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो देश के अलग-अलग राज्यों की वास्तविक सामाजिक, कृषि एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रभावी लाभ सुनिश्चित कर सके।

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