लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गंगधार में लोक मान्यताओं के साथ मनाया जाएगा पर्व
सोना-चांदी और बर्तनों की खरीदारी के साथ झाड़ू खरीदने का विशेष महत्व, जंगल से पीली मिट्टी लाने की भी है परंपरा
गंगधार, झालावाड़। (सुनील निगम, लोक टुडे)
दीपावली से दो दिन पहले मनाए जाने वाले धनतेरस पर्व को लेकर धार्मिक और लोक मान्यताओं के साथ तैयारियां की जा रही हैं। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं, धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। गंगधार क्षेत्र में धनतेरस के अवसर पर महिलाएं जंगल से पीली मिट्टी लाती हैं। यह परंपरा पर्व की स्थानीय सांस्कृतिक पहचान और लोक आस्था से जुड़ी हुई है।
धनतेरस को धन, आरोग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। दीपावली के स्वागत में घरों की साफ-सफाई कर सजावट की जाती है और शुभता के साथ नए सामान की खरीदारी होती है।
झाड़ू खरीदने की परंपरा का धार्मिक महत्व
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा को घर की स्वच्छता और मां लक्ष्मी के स्वागत से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि साफ-सुथरे घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और सुख-समृद्धि का वास होता है। इसी विश्वास के चलते दीपावली से पहले घरों की सफाई की जाती है तथा धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदकर घर में लाने की परंपरा निभाई जाती है।
लोक मान्यताओं में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। ऐसी धारणा है कि धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने से घर में समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है। हालांकि, ये धार्मिक और पारंपरिक विश्वास हैं, जिनका अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से पालन किया जाता है।
प्राकृतिक सींक वाली झाड़ू को देते हैं प्राथमिकता
धनतेरस पर झाड़ू खरीदते समय कई लोग प्राकृतिक घास या सींक से बनी झाड़ू को प्राथमिकता देते हैं। मजबूत सींक वाली और हाथ से तैयार की गई झाड़ू खरीदना भी परंपरा का हिस्सा माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर तैयार झाड़ुओं की खरीदारी को भी महत्व दिया जाता है।
झाड़ू के किसी विशेष प्रकार को शुभ मानने की परंपरा सभी जगह समान नहीं है। ऐसे में लोग अपनी जरूरत और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार झाड़ू खरीदते हैं।
तीन, पांच या सात झाड़ू खरीदने की मान्यता
धनतेरस पर कितनी झाड़ू खरीदनी चाहिए, इसे लेकर भी विभिन्न लोक मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ परंपराओं में विषम संख्या में झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। इसी मान्यता के अनुसार लोग तीन, पांच या सात झाड़ू खरीदते हैं।
हालांकि, झाड़ू की संख्या को लेकर कोई एक सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है। लोग अपनी आवश्यकता और परिवार की परंपरा के अनुसार खरीदारी करते हैं।
जंगल से पीली मिट्टी लाने की परंपरा
गंगधार क्षेत्र में धनतेरस के अवसर पर महिलाओं द्वारा जंगल से पीली मिट्टी लाने की परंपरा भी निभाई जाती है। स्थानीय लोक मान्यताओं से जुड़ी यह परंपरा पर्व के सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है। धनतेरस और दीपावली के दौरान घरों की सजावट तथा धार्मिक कार्यों में मिट्टी का उपयोग किया जाता है।
धनतेरस का पर्व जहां बाजारों में खरीदारी और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सदियों से चली आ रही लोक परंपराओं को भी जीवंत रखता है। झाड़ू खरीदने से लेकर पीली मिट्टी लाने तक की परंपराएं पर्व को स्थानीय संस्कृति और आस्था से जोड़ती हैं।


















































