लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
जयपुर। राजस्थान में National Health Mission (NHM) के तहत आयुष भर्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। होम्योपैथी और यूनानी पद्धति के डॉक्टरों ने भर्ती प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाते हुए परिणाम पर सवाल खड़े किए हैं। इस मुद्दे पर हुई गूगल मीट में व्यापक चर्चा के बाद डॉक्टरों ने कानूनी लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
डॉक्टरों का आरोप है कि NHM भर्ती में आयुर्वेद को अधिक प्राथमिकता दी गई, जबकि होम्योपैथी और यूनानी के उम्मीदवारों को नजरअंदाज किया गया। उनका कहना है कि तीनों पद्धतियों के पेपर अलग-अलग होने के बावजूद एक संयुक्त मेरिट लिस्ट तैयार करना न्यायसंगत नहीं है।
उठाए गए बड़े सवाल
पेपर स्तर में अंतर
होम्योपैथी और यूनानी उम्मीदवारों का कहना है कि उनके पेपर का स्तर अधिक कठिन था, जबकि आयुर्वेद के अधिकांश उम्मीदवार क्वालीफाई हो गए। इससे मेरिट में असंतुलन पैदा हुआ।
कॉमन मेरिट पर आपत्ति
2016 की भर्ती का हवाला देते हुए कहा गया कि उस समय सीटों का बंटवारा आवेदन अनुपात के आधार पर हुआ था, जो अधिक निष्पक्ष था।
मार्किंग सिस्टम पर सवाल
प्रश्न हटाए जाने के बाद मार्क्स कैलकुलेशन का अलग-अलग फार्मूला अपनाया गया, जिससे परिणाम में विसंगतियां आईं।
क्या बोले संगठन
Homoeopathy Development Association के अध्यक्ष डॉ. दीपक मीणा ने कहा कि यह सीधे तौर पर होम्योपैथी और यूनानी डॉक्टरों के साथ अन्याय है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में इन पद्धतियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, बावजूद इसके भर्ती में इन्हें दरकिनार किया गया।
प्रमुख मांगें
वर्तमान परिणाम को तुरंत संशोधित किया जाए
तीनों स्ट्रीम (आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी) की अलग-अलग मेरिट लिस्ट बनाई जाए या
सीटों का बंटवारा आवेदन अनुपात के आधार पर किया जाए
अगला कदम
डॉक्टरों ने ऐलान किया है कि वे जल्द ही राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और NHM अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे। साथ ही, मामले में रिट याचिका दायर कर राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा।
निष्कर्ष
यह मामला अब केवल भर्ती विवाद नहीं, बल्कि आयुष की विभिन्न पद्धतियों के बीच समान अवसर और न्याय की लड़ाई बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और अदालत का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा।




















































