मुबारिक मंसूरी ने की गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

भीलवाड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता मुबारिक मंसूरी ने मुस्लिम समाज से होने के बावजूद केंद्र सरकार को पत्र लिखकर गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई है। मंसूरी ने अपने ज्ञापन में कहा कि सनातन धर्म में गाय केवल आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती की आधारशिला है।

उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से मांग की कि गाय को “राष्ट्रमाता” और “राष्ट्रीय पशु” का दर्जा दिया जाए, ताकि गौवंश संरक्षण को मजबूत कानूनी आधार मिल सके। साथ ही गौ-हत्या करने वालों के खिलाफ कठोरतम कानून और मृत्युदंड जैसे प्रावधान लागू करने की भी मांग की गई।

मंसूरी ने यह भी कहा कि देशभर की गौशालाओं को सरकारी अनुदान, चारा-पानी और चिकित्सा सुविधाएं दी जानी चाहिए। हर ग्राम पंचायत में गौ-संरक्षण सतर्कता समिति गठित कर गौ-तस्करी और अवैध कटान पर रोक लगाई जाए।

ज्ञापन में पशुपालकों को आर्थिक सहायता, बीमा और सब्सिडी देने की मांग भी रखी गई, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा मिल सके।

मुबारिक मंसूरी ने दावा किया कि पिछले 5 वर्षों से वे और राजस्थान प्रदेश मंसूरी समाज लगातार जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्रियों और प्रधानमंत्री कार्यालय तक सैकड़ों ज्ञापन भेज चुके हैं।

मुस्लिम समाज से जुड़े एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाने को लेकर यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है।

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