लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जोधपुर ओपन जेल में गूंजी शहनाई:
जोधपुर। महात्मा गांधी के विचार “अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं” को साकार करता एक अनूठा और मानवीय दृश्य बुधवार को जोधपुर के मंडोर स्थित कृषि विश्वविद्यालय परिसर में संचालित ओपन एयर कैंप जेल में देखने को मिला। यहां आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी मूलाराम और सीमा ने राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति के बाद वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह बंधन में बंधकर अपने जीवन की नई शुरुआत की।
जेल परिसर में आयोजित इस विशेष विवाह समारोह में दोनों के परिजन, जेल प्रशासन, पुलिस अधिकारी और आमंत्रित लोग मौजूद रहे। मंडप सजाया गया, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की सभी रस्में संपन्न हुईं और दोनों ने सात फेरे लेकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।
जेल में पनपा रिश्ता, हाईकोर्ट ने दी कानूनी मंजूरी
मूलाराम और सीमा दोनों ही मंडोर ओपन एयर कैंप जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। जेल में साथ रहने के दौरान दोनों के बीच आपसी विश्वास और स्नेह का रिश्ता विकसित हुआ, जो समय के साथ विवाह के निर्णय तक पहुंचा।
बंदी होने के कारण दोनों के लिए विवाह करना कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा विषय था। इसके लिए मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा, जहां न्यायालय ने मानवीय और सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए विवाह की अनुमति प्रदान की। अदालत ने जेल प्रशासन को ओपन जेल परिसर में ही विवाह की आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी दिए।
अभिजीत मुहूर्त में संपन्न हुआ विवाह
बुधवार को अभिजीत मुहूर्त में आयोजित समारोह में दोनों ने पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया। इस दौरान दोनों परिवारों के सदस्य भी मौजूद रहे और नवदंपती को आशीर्वाद देकर उनके सुखद भविष्य की कामना की।
सामान्य दिनों में सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों की दिनचर्या के लिए पहचाने जाने वाले ओपन जेल परिसर में इस दिन विवाह का उत्सव देखने को मिला। पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण एवं गरिमामय ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं।
जेल प्रशासन की रही विशेष व्यवस्था
ओपन एयर कैंप जेल प्रभारी हापू राम की निगरानी में सुरक्षा और आयोजन की व्यवस्थाएं की गईं, जबकि सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह शेखावत ने पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की।
मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी के सहायक स्वप्न चौहान ने बताया कि हाईकोर्ट के संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण यह विवाह संभव हो सका और दोनों को अपने जीवन की नई शुरुआत का अवसर मिला।
सुधारात्मक न्याय व्यवस्था का बना उदाहरण
यह विवाह केवल दो बंदियों के वैवाहिक जीवन की शुरुआत भर नहीं, बल्कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की उस सोच का प्रतीक भी है, जिसमें अपराधी को दंड देने के साथ-साथ उसके सामाजिक पुनर्वास और सुधार का अवसर भी प्रदान किया जाता है।
ओपन एयर कैंप जेल की अवधारणा भी इसी उद्देश्य पर आधारित है, जहां पात्र बंदियों को अपेक्षाकृत खुले वातावरण में जिम्मेदारी के साथ जीवन जीने और समाज में दोबारा स्थापित होने का अवसर मिलता है।
मूलाराम और सीमा ने विवाह के बाद अपने जीवन की नई शुरुआत की उम्मीद जताते हुए कहा कि वे भविष्य में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। यह विवाह जोधपुर की ओपन जेल में सामाजिक पुनर्वास और मानवीय न्याय व्यवस्था का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।















































