नारी निकेतन की दो अनाथ बेटियों की धूमधाम से हुई शादी 

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 कलेक्टर ने दिया आशीर्वाद; समाजसेवी चंद्र प्रकाश सोनी ने दिए ₹4 लाख

भरतपुर। भरतपुर के नारी निकेतन में रह रही दो अनाथ बेटियों का विवाह बुधवार को पूरे रीति-रिवाज और गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। इस अनूठे आयोजन में जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और स्थानीय लोगों ने परिवार की भूमिका निभाई। शादी समारोह में भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जहां प्रशासन घराती बना तो समाज के लोग कन्यादान और विदाई में सहभागी बने।

विज्ञापन के जरिए चुने गए योग्य वर

समाज कल्याण विभाग ने दोनों बेटियों के विवाह के लिए समाचार पत्रों में विज्ञप्ति जारी कर आवेदन आमंत्रित किए थे। प्राप्त आवेदनों की गहन जांच-पड़ताल के बाद दोनों के लिए उपयुक्त वरों का चयन किया गया। विवाह की सभी तैयारियां विभाग ने स्वयं करवाईं।

हॉस्टल अधीक्षक इंदिरा गुप्ता ने बताया कि गायत्री को आठ वर्ष की उम्र में कोई आश्रम में छोड़ गया था। तब से वह नारी निकेतन में रह रही थी। अब 20 वर्ष की आयु में उसका विवाह शाहपुरा (जयपुर) निवासी हरीश से कराया गया, जो स्टांप पेपर का व्यवसाय करते हैं।

वहीं लक्ष्मी, जो करीब 20 वर्ष की उम्र में नारी निकेतन आई थीं और वर्तमान में लगभग 27 वर्ष की हैं, उनका विवाह बारा निवासी दिलीप से कराया गया। दिलीप कोटा में एक फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं।

कलेक्टर ने दिया आशीर्वाद

विवाह समारोह में जिला कलेक्टर कमल चौधरी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। बारात के स्वागत और वरमाला कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर ने दोनों नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कलेक्टर कमल चौधरी ने कहा कि अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी समाज और सरकार दोनों की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप नारी निकेतन में रह रही बेटियों का सम्मानपूर्वक विवाह कराया गया है और सरकार उनकी हर संभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।

समाजसेवी चंद्र प्रकाश सोनी ने दिया ₹4 लाख का सहयोग

इस विवाह समारोह को यादगार बनाने में भुसावर निवासी समाजसेवी चंद्र प्रकाश सोनी का विशेष योगदान रहा। उन्होंने दोनों बेटियों के विवाह के लिए 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।

चंद्र प्रकाश सोनी ने कहा कि इससे पहले वे चार बेटियों का कन्यादान कर चुके हैं और अब दो और बेटियों की शादी कराकर स्वयं को छह बेटियों का पिता मानते हैं। उन्होंने आगे भी समाज सेवा के कार्य जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

बिना दहेज की शादी पर जताया गर्व

दूल्हे हरीश ने कहा कि उन्हें एक अनाथ बेटी से विवाह कर गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अखबार में प्रकाशित विज्ञापन देखकर आवेदन किया था और बिना दहेज विवाह करना उनके लिए गर्व की बात है।

वहीं दिलीप ने भी कहा कि अनाथ बेटी से विवाह कर उन्हें खुशी और संतोष की अनुभूति हो रही है।

भावुक हुईं बेटियां

विवाह के दौरान गायत्री और लक्ष्मी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि आज पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि उनका भी एक परिवार है। प्रशासन और समाज के सहयोग से उन्हें नया जीवन और नई पहचान मिली है।

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नारी निकेतन में रह रही प्रत्येक बेटी का सम्मानपूर्वक पुनर्वास और विवाह सरकार की प्राथमिकता है। नारी निकेतन में पहली बार एक साथ दो अनाथ बेटियों का विवाह संपन्न कराया गया, जिसकी पूरे शहर में सराहना हो रही है।

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