लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
दयालसिंह सांखला ,जोधपुर
जोधपुर। केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर में मंगलवार को ‘खजूर दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में खजूर की वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना रहा। इस अवसर पर खजूर की विभिन्न उन्नत किस्मों का प्रदर्शन किया गया तथा प्रगतिशील किसानों को पौध सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
कार्यक्रम में काजरी निदेशक डॉ. एच. एस. जाट ने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक फसलों के साथ फलदार पौधों को अपनाने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत काजरी की एबीआई (ABI) यूनिट के माध्यम से नए उद्यमियों को भी तैयार किया जा रहा है।
जिला परिषद जोधपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष मिश्रा ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान की जलवायु खजूर उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन आगामी सीजन में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मिलने वाली सरकारी सब्सिडी एवं योजनाओं के माध्यम से जोधपुर में खजूर की खेती का रकबा बढ़ाने का प्रयास करेगा।
काजरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक धीरज सिंह ने खजूर की उन्नत किस्म ‘ADP-1 (आनंद डेट पाम-1)’ की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 95 प्रतिशत खजूर आयात करता है। ऐसे में यह किस्म स्थानीय उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने बताया कि ADP-1 किस्म मानसून से पहले जून के प्रथम सप्ताह तक पककर तैयार हो जाती है, जिससे फसल खराब होने का जोखिम कम हो जाता है। इसके फल गहरे लाल-जामुनी रंग के, अत्यधिक मीठे तथा टैनिन की मात्रा कम होने के कारण गले में खराश नहीं करते। एक वयस्क पौधा प्रति वर्ष 100 से 180 किलोग्राम तक उत्पादन देने में सक्षम है।
कार्यक्रम में हलावी, बरही, मेडजूल और खुनेजी जैसी अन्य उन्नत किस्मों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर विभिन्न वैज्ञानिक, अधिकारी और किसान उपस्थित रहे।
