अजमेर प्रशासन का एक्शन प्लान: आखा तीज पर बाल विवाह रोकने को सख्ती

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 

 रिपोर्टर: नितिन मेहरा, अजमेर

अजमेर। अजमेर जिला प्रशासन ने आगामी अक्षय तृतीया (आखा तीज) और पीपल पूर्णिमा के अवसर पर होने वाले ‘अबूझ सावों’ को देखते हुए बाल विवाह रोकने के लिए सख्त रणनीति लागू कर दी है। जिला मजिस्ट्रेट लोक बंधु के निर्देश पर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो संदिग्ध गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखेंगी।

शादी की तैयारियों पर प्रशासन की नजर
गठित टीमों में सरकारी शिक्षक, पटवारी, ग्राम सेवक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनियां शामिल हैं। इन्हें विवाह से पहले की गतिविधियों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, जैसे—

  • बच्चों का अचानक स्कूल से छुट्टी लेना या हाथों में मेहंदी होना
  • घरों में शादी के लिए रंग-रोगन
  • बैंड-बाजा, टेंट, हलवाई, पंडित या वाहनों की बुकिंग

अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी क्षेत्र में बाल विवाह होता है, तो संबंधित उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM), तहसीलदार, विकास अधिकारी (BDO) और थानाधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे। लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

तत्काल कार्रवाई और कानूनी प्रावधान
संदिग्ध सूचना मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचकर विवाह रुकवाएगा। आवश्यकता पड़ने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट से निषेधाज्ञा प्राप्त कर माता-पिता और आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत दोषियों पर सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए जाएंगे।

नियंत्रण कक्ष और निगरानी व्यवस्था
हर उपखंड कार्यालय में ‘बाल विवाह नियंत्रण कक्ष’ स्थापित किया जाएगा। यहां शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई होगी और संबंधित सूचनाओं का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।

जनता से अपील
प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि बाल विवाह की जानकारी तुरंत पुलिस या हेल्पलाइन पर दें। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

महत्वपूर्ण तिथियां

  • अक्षय तृतीया: 19 अप्रैल 2026
  • पीपल पूर्णिमा: 1 मई 2026

प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है—समाज से बाल विवाह जैसी कुरीति को खत्म करना और बच्चों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करना।

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