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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
विधायक निधि में 40% कमीशन का स्टिंग: लोकतंत्र पर गहरा सवाल
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश, तीन विधायकों की निधि फ्रीज
जयपुर। राजस्थान में विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास (MLA LAD) निधि में कथित भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। प्रदेश के एक प्रमुख समाचार पत्र द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में यह खुलासा हुआ है कि विधायक निधि से स्वीकृत कार्यों के बदले 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशन की मांग की जा रही है।
स्टिंग में खींवसर से भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा, हिंडौन से कांग्रेस विधायक अनीता जाटव तथा बयाना से निर्दलीय विधायक रितु बनावत के नाम सामने आए हैं। स्टिंग के अनुसार, विधायक रेवंतराम डांगा ने कथित तौर पर कहा कि यदि 50 लाख रुपए का काम है तो 40 प्रतिशत कमीशन देना होगा, साथ ही “अधिकारियों को भी खुश करना पड़ेगा”, जिससे स्पष्ट होता है कि रिश्वत का दायरा केवल जनप्रतिनिधियों तक सीमित नहीं है।
स्टिंग ऑपरेशन में रिपोर्टर ने स्वयं को खादी ग्रामोद्योग से जुड़ा बताते हुए कारपेट और दरी सप्लाई का कार्य दिलवाने की बात कही।
कांग्रेस विधायक अनीता जाटव से संपर्क करने पर उन्होंने पहले बजट नहीं होने की बात कही, लेकिन बाद में जयपुर में अपने करीबी पवन शर्मा के माध्यम से सौदा तय कराया गया। पवन शर्मा ने 30–35 प्रतिशत कमीशन की बात स्वीकार की और 40 प्रतिशत पर भी सहमति जताने की बात कही। आरोप है कि 50 हजार रुपए की एडवांस राशि ली गई तथा विधायक के हस्ताक्षरयुक्त 80 लाख रुपए के कार्य की अनुशंसा पत्र भी दिया गया।

वहीं, बयाना से निर्दलीय विधायक रितु बनावत ने भी बजट न होने की बात कही, लेकिन काम देने की सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने रिपोर्टर द्वारा दी जा रही टोकन मनी लेने से मना कर दिया। स्टिंग रिपोर्ट के अनुसार यह दिन उनके पति ऋषि बंसल ने की और 40 लाख रुपए तक का काम दिलाने की बात कही| विधायक रितु बनावट का कहना है कि यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है यह व्यक्ति 5 महीने से हमारे चक्कर लगा रहा था हमने से साफ मना कर दिया मैं तो अपने से कोई दिल की ना कोई लेटर दिया ना कोई बात हुई यह सिर्फ हमारी छवि खराब करने की साजिश मात्र है |
मुख्यमंत्री का कड़ा रुख
पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा—
“राजस्थान में विधायक निधि में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। हमारी सरकार की नीति भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की है। कोई भी व्यक्ति कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, दोषी पाए जाने पर उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि इस प्रकरण की जांच राज्य के मुख्य सतर्कता आयुक्त (अपर मुख्य सचिव, गृह) की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए। साथ ही संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की MLA LAD निधि को तत्काल फ्रीज कर दिया गया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने भी गठित की समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने भी जांच के लिए एक अलग समिति का गठन किया है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि स्टिंग में सामने आए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
लोकतंत्र पर उठते सवाल
जनता का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन जनप्रतिनिधियों को जनता अपने अधिकारों की रक्षा और विकास कार्यों के लिए चुनकर सदन में भेजती है, वही यदि सवाल पूछने और विकास कार्यों की अनुशंसा के लिए भी कमीशन लें, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा?
यह पहला मामला नहीं है—इससे पहले भी विधायकों द्वारा प्रश्न पूछने के बदले रिश्वत लेने और संसद में सांसदों के सहायकों द्वारा सवालों के लिए पैसे लेने के प्रकरण सामने आ चुके हैं।
इस स्टिंग ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि विधायक निधि में कमीशन का खेल नया नहीं, बल्कि वर्षों से चलता आ रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार तीन विधायक कैमरे में आ गए—वरना यह बीमारी व्यवस्था में कहीं अधिक गहरी है।
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