न्याय की मांग पर सड़कों पर, वकीलों का अनोखा आंदोलन

0
149
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

उदयपुर। उदयपुर की सड़कों पर आज कानून की किताबें नहीं, बल्कि नाराज़गी के पन्ने बिखरे पड़े थे।
काला कोट पहनकर वकील सरकार को यह पाठ पढ़ा रहे थे—“मेवाड़ को हाईकोर्ट बेंच दो, वरना न्याय की किताब में तुम्हारा अध्याय काला लिखा जाएगा।”
न्याय की तलाश में न्यायविद
सोचने वाली बात है कि जिनके कंधों पर पूरे प्रदेश की न्याय व्यवस्था टिकी है, वही सड़क पर बैठकर न्याय मांगने को मजबूर हो रहे हैं।
वकीलों का कहना है कि सरकार हर मंच से “सबका साथ, सबका न्याय” का नारा देती है, लेकिन जैसे ही हाईकोर्ट बेंच की बात आती है, तो नारा बदलकर “सबका सब्र, सबका इंतज़ार” हो जाता है।
धरना बना आईना
कोर्ट चौराहे से निकली रैली दरअसल एक आईना थी—जिसमें साफ दिख रहा था कि न्याय अब पुस्तकालय की अलमारी में नहीं, बल्कि सड़कों की धूल में पड़ा है।
वकीलों ने साफ कहा है कि यह धरना एक-दो घंटे का नहीं, बल्कि दिन-रात जारी रहेगा, जब तक सरकार की कानूनी नींद न टूटे।
सरकार की रणनीति?
सरकार शायद यही सोच रही है कि—धरना भी वकील की तरह “तारीख पर तारीख” देगा और फाइलों में दफ़्न हो जाएगा।
लेकिन इस बार आंदोलन सिर्फ वकीलों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का शोर बन चुका है।
बड़ा सवाल
अब सवाल यही है—क्या सरकार इस आवाज़ को सुनने का नाटक करेगी, या फिर सचमुच एक दिन उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच की नींव रखेगी?
न्याय की बेंच बनाने में सरकार को उतनी ही मुश्किल आ रही है, जितनी संसद में विपक्ष की बेंच पर बैठने की।
फर्क बस इतना है—वहाँ सत्ता की राजनीति है, और यहाँ जनता का अधिकार।
- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here