लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राजसमन्द।
करतवास गांव में समुंदर मंथन कार्यक्रम पीहर पहुंची करीब100 बहिनों को भाइयों ने ओढ़ाई चुनरी
4साल से गांव में समुद्र मंथन की चली आ रही है परम्परा ।
राजसमन्द जिले के करतवास गांव में गांव में शुक्रवार को समुद्र मंथन की परम्परा साकार हुई। इस आयोजन में शरीक होने के लिए करीब सौ से अधिक बेटियां पीहर आई।
फिर भाइयों के साथ तालाब की पाल पर पहुंचकर समद मंथन की परंपरा को निभाया। विद्वान शिक्षक किशन लाल गुर्जर ने बताया कि यह परंपरा चार सालों से चली आ रही है
इस दौरान भाइयों ने बहनों को चुनरी ओढ़ाई। इस अनूठे आयोजन के सैकड़ों लोग साक्षी बने।
इस गांव में पहली बार बुजुर्ग भाई-बहन भी समुद्र हिलोरने पहुचे ओर चुनरीओढ़ाई ओर पानी पिलाया, बताया कि जल संरक्षण का संदेश देने के लिए व इन्द्र देव को प्रसन्न करने के लिए समुंद मंथन की परम्परा की गई है। ग्रमीणों ने बहिनों के साथ मिलकर समुंद मंथन में नाड़ी की ढोल नगाड़े के साथ विद्वान पंडित के विशेष मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना की व भाई भाभी ने जोड़े के साथ नाड़ी के चारो ओर सूत लंबा करते हुए परिक्रमा की इस दौरान बहिन सिर पर कलश धारण करते हुए गीतगाती हुई चलती रही वही ग्रामीण इस दौरान भगवान इंद्र देवता ,नीलकंठं सहीत अन्य देवी देवताओं के जयकारे लगाए जिससे माहौल धर्म मय हो गया ।
बाद भाई जलाशय में जाकर बहन को चुनरी ओढ़ाई, जिस महिला के भाई नहीं थे उसे गांव से ही कोई धर्मभाई बनकर चुनरी ओढ़ाई गई
समुद्र मंथन के आयोजन में ग्रामीण ढोल-डीजे की धुन पर पहुंचते हैं। इन दिनों क्षेत्र में धार्मिक आयोजनों की धूम मची है। यह आयोजन गांव का सामूहिक होता है। इसमें तिथि तय करके विवाहित बेटियों को भी आमंत्रित करते हैं। फिर वे भाइयों के साथ तालाब पर पहुंचकर समद मंथन करती है ताकि उसके भाई के गांव-घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। इस आयोजन में उपसरपंच नारूलाल गुर्जर, हरिराम गुर्जर, निम्दास वेषणव, मोहन लाल, भेरूलाल, गोपी लाल, शंकर लाल, उदयसिंह, रमेश चन्द्र, रोशन लाल ,राजू दास वेषणव सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष मौजूद थे।














































