“परमाणु धमकियों की आड़ में पाकिस्तान का पुराना खेल”

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लोक  टुडे न्यूज नेटवर्क
हेमराज तिवारी

11 अगस्त 2025 को भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में परमाणु हथियारों के खतरे और पाकिस्तान की नीति की असलियत को उजागर कर दिया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख द्वारा अमेरिका यात्रा के दौरान दिए गए बयानों में परमाणु हमले की अप्रत्यक्ष धमकी, न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरनाक है बल्कि वैश्विक स्तर पर गैर-जिम्मेदाराना रवैये का परिचायक भी है।

पाकिस्तान का परमाणु कार्ड – पुरानी चाल, नया मंच

भारत ने बिल्कुल सही कहा कि “Nuclear sabre-rattling is Pakistan’s stock-in-trade” — यानी परमाणु हथियारों की धमकी पाकिस्तान की पुरानी आदत है। यह रणनीति हर बार तब अपनाई जाती है जब पाकिस्तान अपने आंतरिक और बाहरी मोर्चों पर घिरता महसूस करता है।

1999 के कारगिल युद्ध के समय
2001 संसद हमले के बाद

2019 पुलवामा हमले के बाद
हर बार इस परमाणु ब्लैकमेल की कोशिश की गई, ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर भारत के हाथ बांधे जा सकें।

परमाणु जिम्मेदारी का प्रश्न

पाकिस्तान की परमाणु नीति पर दुनिया लंबे समय से सवाल उठाती रही है।

परमाणु हथियारों के कमांड-एंड-कंट्रोल में पारदर्शिता का अभाव , सेना और कट्टरपंथी संगठनों के बीच गहरे रिश्ते
आतंकी समूहों को परोक्ष संरक्षण
इन सबके बीच परमाणु धमकियों का इस्तेमाल दुनिया के लिए सिर्फ चिंता ही नहीं, बल्कि खतरे की घंटी है।
बयान में बिल्कुल सटीक कहा गया कि यह बयान एक “friendly third country” यानी अमेरिका जैसे मित्र राष्ट्र की धरती से दिया गया, जो और भी अफसोसजनक है। इससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान अपने वैश्विक मंचों का भी दुरुपयोग कर सकता है।

भारत की स्पष्ट नीति – न झुकना, न डरना

विदेश मंत्रालय का संदेश स्पष्ट है —

“India has already made it clear that it will not give in to nuclear blackmail.”

भारत ने यह संकल्प लिया है कि वह हर जरूरी कदम उठाकर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। यह रुख न केवल पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देता है बल्कि दुनिया को यह भरोसा भी दिलाता है कि भारत जिम्मेदार परमाणु शक्ति है जो केवल आत्मरक्षा के लिए अपनी क्षमता का इस्तेमाल करेगा।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भारत ने इसे केवल द्विपक्षीय तनाव के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा बताया। अब यह जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की है कि वह ऐसे गैर-जिम्मेदार देशों पर दबाव बनाए, जिनके परमाणु हथियार आतंकवाद के साये में हैं।
पाकिस्तान की यह परमाणु धमकी कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना आत्मघाती होगा। भारत ने अपने रुख और शब्दों से यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर इस ब्लैकमेल में नहीं फंसेगा। अब वक्त है कि अंतरराष्ट्रीय मंच भी इस पुरानी चाल को पहचानकर निर्णायक कदम उठाए।

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