लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
प्राज्ञ स्वाध्याय भवन में महासाध्वी प्रवीणाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा का मंगल प्रवचन
भीलवाड़ा (विनोद सेन)। जीवन में कभी भी दूसरों के लिए बुरा नहीं सोचना चाहिए। जो किसी अन्य के लिए बुरा सोचता है उसके साथ ही बुरा हो जाता है। जैसा व्यवहार हम दूसरों के साथ करेंगे वैसा ही हमारे साथ भी होने वाला है। यदि जीवन में सफलता पानी है तो दूसरों में दोष देखने की बजाय स्वयं में दोष तलाशे। आत्मनिरीक्षण कर लिया तो जीवन में आगे बढ़ते चले जाएंगे।
ये विचार युगदृष्टा आचार्य ज्ञानचंद्रजी म.सा. की आज्ञानुवर्ति परम विदुषी तप दीप्ति महाश्रमणी रत्ना महासाध्वी प्रवीणाश्रीजी म.सा. ने अरिहन्तमार्गी जैन महासंघ के तत्वावधान में भीलवाड़ा के प्राज्ञ स्वाध्याय भवन में शुक्रवार को प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम प्रवचन सुनने तो आते है लेकिन उन्हें आत्मसात करने का पूरा प्रयास नहीं करते है। जो प्राणी जिनवाणी को आत्मसात कर लेता है उसका यह भव ओर आने वाले भव भी सुधर जाते है। ऐसे में सभी को प्रयास करना चाहिए कि चातुर्मास में परमात्मा प्रभु के संदेश श्रवण करने का अवसर नहीं छोड़े।
जिनवाणी सुनने का अवसर हमारी पुण्यवानी से ही प्राप्त होता है। साध्वी प्रवीणाश्रीजी ने कहा कि संसार में प्रत्येक प्राणी खुद को दुःखी मानते हुए सुख पाने के लिए भागदौड़ कर रहा है जबकि सुख तो बाहरी जगत में नहीं बल्कि अपने भीतर है जिन्हें आत्मचिंतन से ही जान पाएंगे। सुख पाने के लिए अपने चिंतन को संकीर्णता ओर नकारात्मकता के दायरे से बाहर निकाल सकारात्मक बनाना होगा।
धर्मसभा में साध्वी नम्रताश्रीजी म.सा., साध्वी जागृतिश्रीजी म.सा. साध्वी स्वर्णरेखाजी म.सा.,अतुलप्रभाजी म.सा., निर्जराश्रीजी म.सा., निसर्गश्रीजी म.सा.,केवलीश्रीजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। चातुर्मास में प्रतिदिन तेले की लड़ी चल रही है। कई श्रावक-श्राविकाओं ने बेला,एकासन, आयम्बिल, उपवास आदि तप के पच्चक्खान भी लिए। अरिहन्तमार्गी जैन महासंघ द्वारा अतिथियों का स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्म सभा का संचालन महावीर पोखरना ने किया। धर्मसभा में विभिन्न क्षेत्रों से गुरूभक्त पधारे ओर दर्शन व धर्मलाभ प्राप्त किया। नियमित प्रवचन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक हो रहे है।

















































