लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
प्राज्ञ स्वाध्याय भवन में महासाध्वी प्रवीणाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा का मंगल प्रवचन
भीलवाड़ा (विनोद सेन)। जीवन में कभी भी दूसरों के लिए बुरा नहीं सोचना चाहिए। जो किसी अन्य के लिए बुरा सोचता है उसके साथ ही बुरा हो जाता है। जैसा व्यवहार हम दूसरों के साथ करेंगे वैसा ही हमारे साथ भी होने वाला है। यदि जीवन में सफलता पानी है तो दूसरों में दोष देखने की बजाय स्वयं में दोष तलाशे। आत्मनिरीक्षण कर लिया तो जीवन में आगे बढ़ते चले जाएंगे।