लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
भूमि की उत्पादकता और स्थानीय परिस्थितियों को भी पात्रता का आधार बनाने की मांग, पंचायत राज संस्थाओं में EWS प्रतिनिधित्व की पैरवी
जयपुर। राजस्थान के शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS आरक्षण व्यवस्था में व्यावहारिक बदलाव और नियमों के सरलीकरण की मांग उठाई है। जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में भाटी ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों की भौगोलिक, कृषि और आर्थिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। ऐसे में EWS पात्रता के लिए समान संपत्ति मानदंड कई इलाकों में व्यावहारिक दिक्कतें पैदा कर सकते हैं।
भाटी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि राज्य सरकारों की ओर से जारी EWS प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय सेवाओं और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी मान्यता देने की व्यवस्था की जाए, ताकि अभ्यर्थियों को अलग-अलग स्तर पर नए प्रमाण-पत्र बनवाने की परेशानी से राहत मिल सके। उनकी यह मांग EWS व्यवस्था को राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने से जुड़ी है।
जमीन का आकार ही आर्थिक स्थिति का पैमाना नहीं : भाटी
रविंद्र भाटी ने EWS पात्रता से जुड़े भूमि संबंधी मानदंडों की समीक्षा की मांग भी रखी। उनका कहना है कि किसी परिवार के पास कितनी जमीन है, केवल इसी आधार पर उसकी आर्थिक स्थिति तय करना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि भूमि के आकार के साथ-साथ उसकी उत्पादकता, सिंचाई की सुविधा, स्थानीय बाजार मूल्य और वास्तविक आर्थिक उपयोगिता को भी पात्रता तय करने में ध्यान में रखा जाना चाहिए।
भाटी के मुताबिक राजस्थान जैसे राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों की कृषि परिस्थितियां काफी भिन्न हैं। कहीं जमीन सिंचित और अधिक उत्पादक है तो कहीं समान क्षेत्रफल वाली भूमि की उत्पादकता और आर्थिक उपयोगिता काफी कम हो सकती है। ऐसे में एक समान मानदंड की समीक्षा जरूरी है।
EWS प्रमाण-पत्रों के आंकड़ों का दिया हवाला
भाटी ने वर्ष 2022-23 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान सरकार की ओर से 2,77,555 EWS प्रमाण-पत्र, जबकि केंद्र सरकार की ओर से 95,243 प्रमाण-पत्र जारी किए गए।
उनके अनुसार इन आंकड़ों में अंतर यह संकेत देता है कि EWS व्यवस्था में राज्य और केंद्र के बीच प्रमाण-पत्रों की मान्यता तथा प्रक्रिया को लेकर व्यावहारिक स्तर पर समन्वय की जरूरत है।
प्रमाण-पत्र की वैधता बढ़ाने की मांग
भाटी ने EWS प्रमाण-पत्र की वैधता को लेकर भी बदलाव का सुझाव दिया। उन्होंने वर्तमान एक वर्ष की अवधि को बढ़ाकर तीन या पांच वर्ष करने की मांग की और निर्धारित शर्तों के तहत शपथ-पत्र के आधार पर नवीनीकरण की सुविधा देने की बात कही।
हालांकि राजस्थान में कुछ शैक्षणिक प्रक्रियाओं में पहले से ऐसी व्यवस्था है, जिसमें निर्धारित शर्तों और अंडरटेकिंग के साथ EWS Income & Asset Certificate को अधिकतम तीन वर्ष तक मान्य माना जा सकता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में राहत की पैरवी
भाटी ने EWS अभ्यर्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा, आवेदन शुल्क और जहां लागू हो, न्यूनतम अर्हता में उचित छूट देने की मांग भी रखी।
उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों और युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों तक पहुंच बनाने के लिए केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को भी सरल और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए।
विवाहित महिला अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाटी ने विवाहित महिला अभ्यर्थियों के EWS प्रमाण-पत्र से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मायके और ससुराल से जुड़े दस्तावेजों को लेकर कई बार अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इस संबंध में स्पष्ट और एकरूप नियम बनाए जाने की मांग की, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को प्रमाण-पत्र बनवाने में अनावश्यक दिक्कत न हो।ॉ

छात्रवृत्ति और छात्रावास जैसी सुविधाओं की मांग
भाटी ने EWS विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, छात्रावास और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की भी मांग की।
इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर विचार करने का सुझाव दिया, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े विषयों के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा सके।
पंचायत राज संस्थाओं में EWS प्रतिनिधित्व की मांग
रविंद्र सिंह भाटी ने EWS वर्ग को पंचायती राज संस्थाओं में प्रतिनिधित्व देने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने दावा किया कि राजस्थान के 75 से अधिक विधायक इस मांग के समर्थन में लिखित सहमति और समर्थन पत्र दे चुके हैं। भाटी के मुताबिक प्रदेश के सांसदों से भी इस मुद्दे पर समर्थन मांगा जा रहा है।
उनका तर्क है कि यदि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शिक्षा और सरकारी सेवाओं में अवसर सुनिश्चित करने की व्यवस्था है, तो स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं में भी उनके प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर विचार किया जाना चाहिए।
केंद्र से समान अवसर की व्यवस्था का आग्रह
भाटी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि EWS व्यवस्था में राज्य और केंद्र के बीच प्रमाण-पत्रों की मान्यता, पात्रता के मानदंड और प्रक्रिया में व्यावहारिक समन्वय स्थापित किया जाए।
उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह होना चाहिए कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के पात्र युवाओं को अलग-अलग नियमों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के कारण अवसरों से वंचित न होना पड़े।
अब भाटी की इन मांगों पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर नजर रहेगी। खास तौर पर राज्य के EWS प्रमाण-पत्रों की केंद्रीय स्तर पर मान्यता, भूमि संबंधी मानदंडों की समीक्षा और पंचायत राज संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की मांग आने वाले समय में चर्चा का विषय बन सकती है।
















































