लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
संत सुखदेवजी महाराज बोले— भक्तों की महिमा भगवान से भी महान, गौसेवा व मातृ-पितृ सेवा से मिलता है वास्तविक सुख
लाम्पोलाई। ग्राम लाम्पोलाई स्थित श्री श्याम गौशाला परिसर में सात दिवसीय श्री भक्तमाल कथा का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस हजारों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे गौशाला परिसर में राम नाम के जयकारों, भजन-कीर्तन और भक्तिमय वातावरण की अनूठी छटा देखने को मिली।
कथावाचक संत श्री सुखदेवजी महाराज ने भक्तमाल ग्रंथ के प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान से भी अधिक महिमा उनके भक्तों की होती है। भक्तों का जीवन त्याग, सेवा, समर्पण और भक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भक्तमाल कथा का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन में सदाचार, सेवा, परोपकार और धर्म के संस्कार विकसित होते हैं तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
संत श्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन को राम नाम रूपी अमूल्य धन से समृद्ध बनाना चाहिए। काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे विकार मनुष्य की भक्ति रूपी पूंजी को नष्ट कर देते हैं। उन्होंने सत्संग, गुरु वाणी और प्रभु स्मरण को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।
गौसेवा और मातृ-पितृ सेवा को बताया सर्वोच्च पुण्य
संत श्री सुखदेवजी महाराज ने गौसेवा, मातृ-पितृ सेवा एवं संत सम्मान को जीवन का सबसे बड़ा पुण्य बताते हुए कहा कि जहां गौ माता, संतों और बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहां सदैव सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का वास रहता है। उन्होंने समाज में प्रेम, भाईचारे और संस्कारों की स्थापना के लिए धार्मिक आयोजनों और सत्संग की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।
महाआरती और प्रसाद वितरण में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
कथा समापन अवसर पर श्री श्याम गौशाला समिति, भामाशाहों, कार्यकर्ताओं एवं गौभक्त श्रद्धालुओं द्वारा संत-महात्माओं का अभिनंदन किया गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक महाआरती में भाग लेकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
राजस्थानी परंपरा के साथ हुआ संत सम्मान
समापन समारोह में कथावाचक संत श्री सुखदेवजी महाराज का राजस्थानी परंपरा अनुसार साफा, शॉल एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। आयोजन समिति की ओर से उन्हें श्री भक्तमाल कथा की स्मृति स्वरूप विशाल फोटो फ्रेम एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
इस दौरान महिलाओं ने भजन-कीर्तन और धार्मिक गीतों पर उत्साहपूर्वक भाग लेकर भक्ति उत्सव को यादगार बना दिया। कार्यक्रम के अंत में संत-महात्माओं को भावभीनी विदाई दी गई तथा क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और भाईचारे की मंगलकामना की गई।
इस अवसर पर तुकारामजी महाराज भदवासी, ओमदासजी महाराज कुचेरा, जगदीशरामजी महाराज, जीवणदासजी महाराज कंवरियाट, गिरधारीरामजी महाराज कुचेरा, संत भोमजी महाराज कुडकी, भंवर साहिब महाराज, विमला बाईजी महाराज रेण, पप्पू बाईजी महाराज लाडपुरा सहित बड़ी संख्या में गौभक्त, श्रद्धालु एवं महिला शक्ति उपस्थित रही।














































