लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
भरतपुर। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के विरोध में शुक्रवार को भरतपुर में छात्र संगठनों ने शांति मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया। यातायात चौराहे से जिला कलेक्ट्रेट तक निकाले गए मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। प्रदर्शन के मद्देनजर जिला कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए तथा भारी पुलिस बल तैनात रहा।
मार्च का नेतृत्व पूर्व छात्रसंघ महासचिव (एमएसजे कॉलेज) एवं छात्र नेता हरजीत सिंह सांखला ने किया। प्रदर्शनकारी रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में लगाए आरोप
ज्ञापन में प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर संसद की ओर मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और आरएएफ ने बल प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र-छात्राएं घायल हुए। उन्होंने इस घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
चार प्रमुख मांगें रखीं
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम दिए ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखीं—
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को हटाने की मांग।
- एनटीए अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग।
- दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए समिति गठित कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई।
छात्र नेताओं ने रखी अपनी बात
छात्र नेता हरजीत सिंह सांखला ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर युवाओं में आक्रोश बढ़ रहा है और सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल वर्षा कुमारी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी परीक्षाओं के संचालन में विफल रही है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में खामियां हैं तो उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और छात्रों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
वहीं मधु चौधरी ने भी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनका कहना था कि परीक्षाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
शांति मार्च के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क रही। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद प्रदर्शनकारी वापस लौट गए।

















































