विधि शिक्षा मानवता और न्याय प्रणाली के उच्च आदर्शों को आत्मसात करने का माध्यम: हरिभाऊ बागडे

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जयपुर (लोक टुडे न्यूज नेटवर्क)। डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर का तृतीय दीक्षांत समारोह राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान के उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा उपस्थित रहे।

इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. (डॉ.) निष्ठा जसवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया, जबकि कुलसचिव वीरेन्द्र वर्मा (आरएएस) ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

25,258 विद्यार्थियों को डिग्री

दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के 25,258 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें 16,748 छात्र एवं 8,510 छात्राएं शामिल थीं। साथ ही 9 स्वर्ण पदक भी वितरित किए गए। इसी अवसर पर सभी डिग्रियों को डिजीलॉकर पर भी अपलोड किया गया।

⚖️ “विधि शिक्षा केवल पेशा नहीं, सेवा का माध्यम”

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने संबोधन में कहा कि विधि शिक्षा केवल तर्क का क्षेत्र नहीं, बल्कि संवेदना और मानवता का भी माध्यम है। उन्होंने कहा कि एक अच्छे विधिवेत्ता के लिए नैतिकता, धैर्य और मानवता आवश्यक हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे जहाँ भी जाएँ, न्याय को धर्म, सत्य को मार्ग और संविधान को प्रेरणा मानकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विद्यार्थियों की जिम्मेदारी होगी कि वे न्याय व्यवस्था की गरिमा को बनाए रखें।

संविधान और सामाजिक न्याय पर जोर

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि विधि शिक्षा केवल पेशेवर सफलता का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना का आधार है।

उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी और आज के विधि विद्यार्थी इस परिवर्तन के प्रहरी हैं।

️ विश्वविद्यालय की उपलब्धियां

कुलगुरु निष्ठा जसवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय विधि शिक्षा के साथ-साथ संवैधानिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि दीक्षार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि समाज में न्याय के जिम्मेदार प्रतिनिधि बनेंगे।

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