लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सीकर में छात्र ने नीट परीक्षा रद्द होने पर आत्म#ह#त्या
सीकर। नीट परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के विद्यार्थियों में आक्रोश के बीच शिक्षानगरी में एक छात्र ने लापरवाह सिस्टम से हार मानते हुए अपनी जान दे दी। परीक्षा रद्द होने की वजह से अवसाद में आए एक छात्र ने शुक्रवार दोपहर को कमरे में आत्महत्या कर ली है। नीट परीक्षा रद्द होने के बाद देश में यह पहला सुसाइड का मामला है।
छात्र प्रदीप माहिच (23) बहन की चुन्नी से फंदा लगाकर पंखे से लटक गया। परिवार का दावा है कि प्रदीप के नीट यूजी 2026 परीक्षा में करीब 650 प्लस अंक आ रहे थे। इन अंकों से प्रदेश की अच्छी मेडिकल कॉलेज मिलने की पूरी संभावना थी। वह पिछले तीन साल से सीकर में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था और इसी साल पेपर अच्छा हुआ था। नीट रद्द होने के बाद से पिछले चार दिन से वह गहरे अवसाद में था और इसी कारण उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। परिवार व समाज के लोग एसके हॉस्पिटल की मोर्चरी के सामने एकत्रित हो गए। मृतक छात्र मूलत: कनिका की ढाणी, गुढ़ागौड़जी, झुंझुनूं का निवासी था।
छात्र के पिता राजेश कुमार मेघवाल ने बताया कि उनके चार संतान हैं। प्रदीप माहिच तीन बहनों में इकलौता था। प्रदीप दूसरे नंबर पर था। वह अपनी दो बहनों के साथ सीकर में पिपराली रोड स्थित जलधारी नगर में एक मकान की चौथी मंजिल पर टीनशेड का कमरा किराए पर लेकर रह रहा था। प्रदीप माहिच की एक बड़ी व एक छोटी बहन रेल्वे की तैयारी कर रही हैं।
दोपहर को प्रदीप की छोटी बहन कोचिंग गई हुई थी। वहीं बड़ी बहन बाथरूम में नहाने गई हुई थी। इस दौरान प्रदीप कमरे में ही बैठा हुआ था। प्रदीप ने शुक्रवार दोपहर को बहन की चुन्नी का फंदा लगा पंखे पर लटक आत्महत्या कर ली। बड़ी बहन नहाकर आई तो उसने भाई को पंखे से लटके देखा और कैंची से फंदा काटकर उसे नीचे उतारा और मकान मालिक व पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदीप को एसके हॉस्पिटल में चिकित्सकों को दिखाया। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार की आर्थिक हालत खराब
पिता राजेश कुमार व बड़ी बहन ने बताया कि नीट यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद से ही वह काफी निराश व अवसाद में था। बहनें उसका पूरा ध्यान रख रही थीं। पिता व परिवार के अन्य दोपहर बाद मोर्चरी पहुंचे। देर शाम तक छात्र के शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया। राजेश कुमार खेतीबाड़ी व मजदूरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। पिता, मां व तीनों बहनों को भाई पर ही आशा थी। तीसरे नंबर की बहन गांव में माता-पिता के साथ रह रही हैं।














































