ब्रज महोत्सव में साकार हुई ब्रज संस्कृति

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जयपुर में राजस्थान दिवस पर ब्रजभाषा अकादमी और पोद्दार संसथान के सयुक्त तत्वाधान में

जयपुर। राजस्थान दिवस के अवसर पर जवाहर कला केंद्र में ब्रज महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी और पोद्दार संस्थान संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। महोत्सव में ब्रज भाषा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, साहित्य और लोक कलाओं की आकर्षक झलक प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक गणेश वंदना से हुआ, जिससे वातावरण आध्यात्मिक एवं मंगलमय हो उठा।
राजस्थान दिवस के अवसर पर राजस्थानी लोक नृत्य पधारो मारो देश की सुंदर प्रस्तुति की गई ।
इसके पश्चात आकर्षक मयूर नृत्य की प्रस्तुति की गई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही, कार्यक्रम में विशेष रूप से फूलों की होली का आयोजन किया गया, जिसने पूरे समारोह में आनंद और उत्साह का रंग भर दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ब्रजभाषा कवियों का कवि सम्मेलन रहा, जिसमें विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति, श्रृंगार और लोकजीवन की सुंदर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। इस अवसर पर ब्रजभाषा के प्रतिष्ठित कवियों एवं साहित्यकारों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।

राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी की सचिव डॉ. लता श्रीमाली ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य ब्रज भाषा के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना, इसके साहित्यिक स्वरूप को सशक्त बनाना और रचनाकारों को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में प्रदेशभर से आए कवियों और साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि ब्रज भाषा भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर है, जिसकी साहित्यिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है।

इस अवसर पर सुरेश मिश्रा, मुख से गुंगरू की आवाज़ निकालने वाले शंकर गर्ग, ग्लोबल बृज फोरम के मेंबर्स, प्रसिद्ध कथक गुरु सुमन यादव,स्कूल कॉलेज के टीचर्स, और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे

वहीं पोद्दार संस्थान के चेयरमैन डॉ. आनंद पोद्दार ने कहा कि ब्रज भाषा और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से इस महोत्सव का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत की गई, जिसमें पारंपरिक मयूर नृत्य, फूलों की होली और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहीं।

महोत्सव में प्रदेशभर से ब्रज भाषा के कवि, साहित्यकार, कलाकार, शोधकर्ता और साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस आयोजन के माध्यम से ब्रज भाषा के संरक्षण, संवर्धन और साहित्यिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई गई। मिलने की उम्मीद जताई गई

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